नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2025 में इस बार दीपवाली कब मनाई जाएगी, जानिए पूजा की सही तिथि क्या होगी, पूजा करने की विधि क्या रहेगी और दीपवाली कथा के बारे में जानेगे आईये जानते हैं।
2025 Deepawali Date And Time: मित्रो दीपावली का पर्व कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। दीपावली को दीवाली, दीपोत्सव, प्रकाश पर्व आदि मामो से भी जाना जाता है। यह हिन्दुओ का सबसे बड़ा पर्व है। इसमें भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस। दिन व्रत नही किया जाता है बल्कि इस दिन तरह-तरह की मिठाईयां तथा पकवान बनाये और खाये जाते है।
ऐसी मान्यता है की जब भगवान श्रीराम ने रावण का बध कर दिया और फिर विभीषण विभीषण का राज्याभिषेक हुआ तो उस समय उनके वनवास की अवधि समाप्त हो चुकी थी। अतः वह माता सीता व लक्ष्मण के साथ में वहां से अयोध्या के लिए चल पड़े। जब भगवान श्रीराम अयोध्या पहुचे तो उस समय कार्तिक मास की अमावस्या थी और चारो ओर घोर अंधकार था।
अतः उस अंधकार को दूर करने के लिए और भगवान श्रीराम के वापस आने की प्रसन्नता में अयोध्या के निवासियों ने अपने घरों पर दीपक जलाएं थे। तब से ही दीपावली मनाने की परम्परा चली आ रही है।
दीपावली पूजा करने की विधि
दीपावली से पहले ही अपने घर दुकान आदि की अच्छी तरह से सफाई कर लेनी चाहिए। भगवान गणेश एवं माता लक्ष्मी की नई मुर्तिया लानी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार दीपक, रुई, सरसो का तेल, मोमबत्ती, कपूर, धूप बत्ती, रोली, चावल, कलावा, आदि लेकर रख लेना चाहिए।
फिर दीपावली के दिन घर-दुकान आदि की अच्छी तरह से धो पोछ लेना चाहिए। उसके बाद स्नान आदि करले। फिर अशोक, आम आदि के पत्तो से बने हुए तोरण लाकर अपने दुकान और दरवाजे पर बाधे। आवश्यकता अनुसार फूल, खीर, बतासे, मिठाई आदि भी ले आये।
फिर जिस स्थान पर पूजा करनी हो वहा पर लकड़ी का पटरा या चौकी रखे। फिर शाम को जब पूजा करने का मुहूर्त आये तो परिवार के सभी लोग एकत्रित हो। फिर वहा पर कुछ दीपक जलाये फिर सभी लोग एक-एक करके भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को रोली चावल लगाये और उनको खीर बतासे, मिठाई आदि समर्पित करे।
फिर परिवार का कोई एक व्यक्ति सभी परिवारजनों के माथे पर तिलक लगाएं। और उनके हाथ मे कलावा बांधे। पुरुष के दाएं हाथ मे और स्त्रियो के बाएं हाथ कलावा बाधना चाहिए। फिर कोई व्यक्ति दीपावली की पूजन कथा को कहे और अन्य व्यक्ति शांति के साथ मे सुने।
फिर कपूर जलाकर सभी लोग आरती करें। और भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की आरती गाये। इस अवशर पर शंख, घंटा, आदि बजाने चाहिए। अंत मे जोर का जयकारा लगाए। फिर सभी लोग भगवान गणेश और माता लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि हे प्रभु! हमे सदबुद्धि, सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करे।
हमे ज्ञान और धन दोनों ही प्राप्त हो हमारे सभी रोग सोग, सदैव के लिए दूर हो और हमारे ऊपर आपकी कृपा सदैव बनी रहे। इसके बाद में प्रसाद ग्रहण करे फिर अपने घर प्रतिष्ठान आदि को दीपक से सजाना चाहिए। फिर अपने परिचितों आदि को दीपावली की शुभकामनाएं देनी चाहिए।
दिलवाली का महत्व
दीपावली का पर्व कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। दीपावली का पूजन करने से अति उत्तम फल प्राप्त होता है। इससे घर मे भगवान श्री गणेश जी सदबुद्धि तथा माता लक्ष्मी जी धन संपदा का आगमन होता है। इससे मनुष्य के सभी रोग दोष दूर होता है। और घर परिवार में खुशियों आती है।
2025 Deepawali Date And Time: जाने 2025 में दिवाली कब है, तारीख और समय?
| व्रत त्योहार के नाम | तारीख और समय |
|---|---|
| दीपावली | 20 अक्तूबर २०२५ सोमवार |
| कार्तिक अमावस्या तिथि शुरू होगी | 20 अक्तूबर २०२५ – दोपहर 03:44 बजे |
| कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त होगी | 21 अक्तूबर २०२५ – शाम 05:54 बजे |
| लक्ष्मी पूजा का समय | रात 07:08 – रात 08:18 बजे तक |
| प्रदोष काल पूजा का समय | शाम 05:46 – रात 08:18 बजे तक |
दीपावली व्रत की कथा
एक नगर में देवी प्रसाद नामक बड़ा सेठ था। वह भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का परम भक्त था। उसके तीन लड़के थे उसका व्यापार बहुत उत्तम रीति से चल रहा था। वह सामाजिक कार्यो में भी पर्याप्त दान किया करता था। जब उसके लड़के बड़े हुए तो उसने क्रमशः सभी का विवाह कर दिया।
तीनो ही लड़के अपनी-अपनी पत्नियों के साथ मे अलग-अलग घरों में जाकर रहने लगे। इससे सेठ का व्यापार धीरे-धीरे स्थिर हिने लगा और उसके घर मे दरिद्रता आने लगी। उधर तीनो लड़के भी दरिद्रता में ही जीवन-यापन कर रहे थे। इस प्रकार से पूरा परिवार ही हतास-निराश हो गया था।
अपने भक्त की दुर्दशा को देखकर एक दिन भगवान गणेश एक महात्मा का रूप धारण करके उस सेठ के घर पर पधारे। तब सेठ ने उनका स्वागत-सत्कार किया और उनसे अपनी दरिद्रता के निवारण का उपाय पूछा। तब महात्मा जी ने कहा-“हे सेठ! कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन तुम अपने घर पर भगवान गणेश एवं माता लक्ष्मी का पूजन करो।
इसमे अपने तीनों लड़को को भी बुलाओ। तब मैं तुम्हे सुख-समृद्बी प्राप्त करने का अचूक मन्त्र बताऊँगा। महात्मा जी की आज्ञा को मानकर उस सेठ ने वैसा ही आयोजन किया। तब महात्मा जी ने आकर सेठ और उसके तीनो लड़को से पूजन करवाया और फिर कहा अब मैं तुम सभी को सुख-समृद्धि की प्राप्ति का अचूक मंत्र बताता हूँ।
उस मन्त्र का नाम है-संगठन। इसका तातपर्य यह है कि-आप सभी को मिल-जुल कर रहना चाहिए क्योकि संगठित होकर रहने से और परस्पर सहयोग करने से व्यापार आधी में उन्नति होती है। संगठन की शक्ति से ही देश और धर्म की रक्षा होती है। संगठन से ही भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अर्थात सद्बुद्धि आती है। संगठन से ही माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। अर्थात धन-सम्पदा में निरंतर वृद्धि होती है। यू तो भगवान श्रीराम अकेले ही रावण आदि राक्षसो का वध करने में समर्थ थे लेकिन संगठन के महत्व को प्रदर्षित करने के लिए ही उन्होंने ने सुग्रीव आदि वानरों से मित्रता की और सबके सामुहिक सहयोग से ही लंका पर विजय प्राप्त की।
इसलिए आप सभी को भी परस्पर संगठित होकर रहना चाहिए और एक – दूसरे के प्रति वैमनस्य की भवना नही रखनी चाहिए। महात्मा जी के द्वारा दिये गए उपदेशो को सुनकर उन सभी को ज्ञान की प्राप्ति हुई। फिर उस सेठ के तीनों लड़के वापस अपने घर आ गए और सभी लोग मिल-जुलकर रहने लगे।
इससे उनके व्यापार में पुनः प्रगति हुई और उनको अपार धन- सम्पदा की प्राप्ति हुई। इस प्रकार से जो लोग दीपावली-पूजन के समय इस कथा का पाठ करते हैं और इसमें बताये गये मार्ग पर चलते हैं-उनको भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे मनुष्य शीघ्र ही उन्नति के शिखर पर पहुँच जाते हैं।
