नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2025 में करवा चौथ का व्रत कब है। पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, पूजा करने की विधि क्या होगी, और रात्रि में चंद्रोदय होने का समय क्या रहेगा ! आईये जानते है।
2025 Karwa Chauth Kab Hai: करवा चौथ हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पुरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। और रात के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों से जल पीकर व्रत को पूरा करती हैं। चंद्रोदय के बाद ही करवा चौथ व्रत का पारण किया जाता है। यानी इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक उपवास रखती हैं।
महिलाएं निर्जला व्रत कर, पूजा पाठ कर पति की लंबी उम्र की कामना करती है। ताकी पति-पत्नी का साथ जन्मों-जन्मों तक बना रहे। सिर्फ सुहागिन महिलाये ही नहीं बल्कि वे युवतियों, जिनका विवाह तय हो चुका होता है। वे करवा चौथ का व्रत रखती है। माना जाता है कि अगर करवा चौथ का व्रत महिला पूरे विधि-विधान से रखती है। तो उसके पति की उम्र लंबी होती है। और अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। साथ ही सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
करवा चौथ व्रत पूजन विधि
करवावौथ व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद नए वस्त्र धारण करे। इसके बाद ईश्वर का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। यदि आपके वहा सरगी का रिवाज है तो सास द्धारा दिया हुआ भोजन करे। ध्यान रखें कि सुर्योदय से पहले ही सरगी खा लें। और उसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प ले। करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाये इस दिन पुरे सोलह शृंगार में रहे। शाम के समय एक चौकी पर मां पार्वती और शिव की कोई ऐसी फोटो रखें, जिसमें भगवान गणेश मां पार्वती की गोद में बेठे हों।
अब पुजा की थाली सजाये. पूजा थाल में धूप, दीप,वन्दन,रोली और सिन्टूर आदि चीजे रखे. इसके बाद कोरे करवा में जल भरकर प्रजा में रखें और मां पार्वती को श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।।चन्द्रमा गिकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू कर दें। करवा चौथ व्रत की कथा सुने और पदें। कथा सुनते समय हाथ पर गेहूं या चावल के 13 दाने लेकर कथा सुनें। चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी या जल के अंदर चंद्रमा को देखें। इसके बाद चांद की पजा करें और उन्हें अर्घ्य दें।
अब छलनी।से ही अपने पति का चेहरा को भी देखे और उनठी लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत संपन्न करें। चन्द्र-दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर सारी, सुहाग की वस्तुए, मिठाई, फल, मेवे, दक्षिणा आदि देकर उनका आशीर्वाद ले और सास अपनी बहु को अखंड सोभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे। अंत में महिलाये अपने से बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लें। व्रत पारण के बाद सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
2025 Karwa Chauth Kab hai 2025 में करवा चौथ व्रत कब है?
| व्रत त्यौहार का नाम | दिन व दिनांक |
|---|---|
| करवा चौथ व्रत | 10 अक्टूबर २०२६ – शुक्रवार |
| कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि प्रारम्भ होगी | 09 अक्टूबर २०२६ – रात 10:54 बजे |
| कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि समाप्त होगी | 10 अक्टूबर २०२६ – शाम 07:38 बजे |
| करवा चौथ पूजा शुभ मुहूर्त | 10 अक्टूबर २०२६ – शाम 05:५७ बजे रात 07:11 बजे तक |
| चन्द्रोदय का समय रहेगा | शाम 07:42 बजे तक |
साल २०२५ में करवा चौथ का चाँद 10 अक्तूबर को शाम 07:42 मिनट पर निकलेगा हालाकि अलग-अलग शहरो में ये समय अलग- अलग होगा चन्द्रमा की पूजा के विना ये व्रत पूरा नहीं माना जाता है। चाँद के निकलने पर अर्घ दिया जायेगा चंद्रमा को अर्घ देने के दौरान महिलाये छलनी से चन्द्रमा के दर्शन करती है। और फिर दीपदान के बाद उसे जल अर्पित करती है उसके बाद व्रती पारण करके व्रत को पूरा करेगी।
