नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्रि के नौवा दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करे? मां को कैसा भोग लगाएं, किस रंग के कपड़े पहने और किस तरह पूजा करके मां को प्रसन्न करें। भक्त इसके अलावा इस दिन किये जाने वाले उपाय के बारे में ! आईये जानते है।
2025 Navratri 9th Day Puja Vidhi: हिन्दू धर्म मे शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का एक अपना महत्व माना जाता है। नवरात्रि माता दुर्गा को समर्पित होता है। नवरात्रि में मां को प्रसन्न करने केलिए भक्तजन व्रत व पूजा अनुष्ठान करते है। मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दिनों मां के नौ स्वरूपों की पूज्ञा अर्चना करने से मां भक्तो की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। और घर मे शुख समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि में नवमी तिथि का काफी महत्व होता हैं। नवरात्रि में पड़ने वाली दुर्गा नवमी को दुर्गा नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिवजी को पति रूप में पाने के लिए ही मां महागौरी स्वरूप में जन्म लिया था।
इस दौरान उन्हें कई वर्षो तक कठोर तप करना पड़ा था और किये गए अपने कड़े तप की वजह से मां का रंग काला पड़ गया था। माता पार्वती की श्रद्धा से महादेव अति प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया जिसके बाद देवी पार्वती का रंग गोरा हो गया। उसी दिन से देवी पार्वती का ये स्वरूप महागौरी के नाम से विख्यात हुआ। मां दुर्गा का ये रूप
बेहद शांत एवं निर्मल होता है।
हिन्दू धर्म में शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का अपना एक विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र के 9 ढिनों में देवी दुर्गा के नो रुपों की विधि विधान से पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है| माना जाता है कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां दुर्गा धरती पर आकर अपने भत्तों की सभी परेशाियां दूर करती है।
नवरात्रि के नौवें दिन (जिसे महानवमी या नवमी भी कहा जाता है) माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। और उनकी पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, यश, बल, धन की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशहाली आती है।
मां सिद्धिदात्री पूजा विधि
नवरात्र के नौवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और साफ वस्त्र धारण करें। अपने घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें और एक साफ आसन पर मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। फिर कलश की पूजा करें और मां का ध्यान करते हुए आह्वान करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां को सफेद या बैंगनी रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करें। उन्हें रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। और पूजा के अंत मे मां सिद्धिदात्री से अपने सकुसल होने की प्रार्थना करे।
मां सिद्धिदात्री का भोग
मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी, चना, खीर और नारियल का भोग लगाए।और मौसमी फलों को भी अर्पित करे।
मां सिद्धिदात्री का मन्त्र
“ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥”
“या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली है। एक वाह सिंह है यह कमल के फूल पर विराजमान है। इनके दाहिने तरह के नीचे वाले हाथ मे कमल का पुष्प विराजित है। नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम है। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शारदीय विधि विधान के साथ करते हुए। भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी पूजा में शामिल होते है इस सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तो और साधको को लौकिक, परलौकिक कामनाओ की पूर्ति होती है। मां सिद्धिदात्री की कृपा पाने के बाद भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नही है।
जिसे वह पूर्ण करना चाहे वह सांसारिक इच्छाओं आवश्यकताओ से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्या लोकों में विचरण करता हुआ। उनकी कृपा रस पियूष का निरंतर पान करता हुआ विषय भूख से शून्य हो जाता है। इनकी कृपा से अनंत दुख रूपी संसार में सारे सुखों का उपयोग करता हुआ मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। लेकिन अपनी शक्ति अनुसार जब तब पूजा अर्चना कर भक्तजन मैन के कृपा के पत्र बन सकते हैं। और उनके चरणों का सानिध्य प्राप्त कर सकते हैं। मैं माता से प्रार्थना करती/करती हूं।
