नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2025 में इस बार अहोई अष्टमी कब मनाई जाएगी, पूजा की सही तिथि, शुभ मुहर्त, पूजा विधि, और इस दिन पढ़ी जाने वाली कथा के बारे में जानेंगे ! आईये जानते है।
Ahoi Ashtami 2025 Date And Time: मित्रो यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णा पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। इसलिये इसे आठे का व्रत या अष्टमी का व्रत या अशोकाष्टमी का व्रत’ भी कहा जाता हैं। इसमें अहोई माता की की पूजा की जाती है। इसलिये इसे अहोई आठे का व्रत भी कहते हैं। यह दीपावली से एक सप्ताह पहले होता है। जिस दिन (वार) को यह व्रत होता है, दीपावली थी प्रायः उसी दिन (वार) की होती हैं। इस व्रत को वे स्त्रिया ही करती हैं जिनके सन्तान होती है।
अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
मान्यता है कि अहोई आठे का व्रत करने से अति अति उत्तम फल मिलता है। या व्रत को करने वाली स्त्रियों की सभी सन्ताने दीर्घायु होती है और उनके रोग-शोक दूर होते है। और उनको सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है और उनमें सदबुद्धि का विकाश होता है। और उनमें सभी प्रकार के सदगुड आते है। इस व्रत को करने वाली स्त्रियो की संतानें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करती है।
अहोई अष्टमी का व्रत करने की विधि
इस दिन स्त्री पूरे दिनभर व्रत रखें। फिर सायंकाल को घर के आंगन की दीवार पर या अपने घर के पूजाघर के निकट की दीवार पर अष्ट-कोष्ठक की अहोई की पुतली बनाये। और उसमें इच्छानुसार रंग भरे। फिर उसके पास में सेई तथा सेई के बच्चों का चित्र बनायें (अथवा- बाजार से अहोई आठे का कैलेण्डर लाकर लगा ले – अथवा- इसी पुस्तक की एक अन्य प्रति रख लें)। फिर सूर्यास्त के बाद में (आसमान में तारे दिखने पर) वहाँ की धरती को साफ पानी से धो लें। फिर वहाँ पर आठे से चौक पूर लें और उस पर लकडी का एक पटरा रख लें। फिर एक लोटे पर रोली से सतिया (स्वास्तिक)। बना लें और उसमें पानी भरकर उसे पटरे पर रख दें। एक कटोरी में हलवा तथा श्रद्धानुसार रुपये रखें। फिर टोली, चावल, हलवा आदि से अहोई माता का पूजन करें।
इसके बाद में सभी महिलायें अपने हाथ में गेहू के सात-सात दाने लें। फिर कोई एक महिला व्रत की कथा को पढे तथा अन्य।महिलायें शान्तिपूर्वक सुनें। फिर अन्त में सभी मिलकर अहोई माता की जय’ बोलकर जयकारा लगाये। और हाथ में लिये हुये गेहूँ के दानों को पक्षियों को चुगने के लिये डाल दे। इसके बाद में आसमान में तारों को देखते हुये, लोटे में रखा हुआ पानी चढा दें ( इसे अर्घ्य देना।कहते हैं ) अथवा घर मे तुलसी का पौधा लगा हुआ हो तो उसमें चढा दें। फिर कटोरी में रखा हुआ हलवा और रुपये अपनी सास को दें (इसे बायना देना कहते हैं) और उनके पाँव छूकर उनसे आशीर्वाद लें। यदि सास न हों तो घर में आपसे बडी जो भी महिला हो ( जैसे – चचेरी सास, जेठानी आदि) तो उन्हें बायना दें। इसके बाद में स्वयं भोजन करें।
Ahoi Ashtami 2025 Date And Time: 2025 में अहोई अष्टमी कब है?
| व्रत त्योहार के नाम | दिन व दिनांक |
|---|---|
| अहोई अष्टमी व्रत | 13 अक्टूबर 2025 – सोमवार |
| अष्टमी तिथि शुरू होगी | 13 अक्टूबर 2025 – दोपहर 12:24 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्त होगी | 14 अक्टूबर 2025 – सुबह 11:10 बजे |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | शाम 05:40 बजे – शाम 06:54 बजे तक |
| तारे देखने का समय | शाम – 06:03 बजे |
अहोई अष्टमी व्रत की कथा
एक साहूकारू था जिसके सात बेटे थे, सात बहुयें थीं और एक बेटी थी । दीपावली से पहले कार्तिक बंदी अष्टमी के दिन सातों बहुयें अपनी इकलौती ननद के साथ में जंगल से मिट्टी लेने के लिये गई। जहाँ से वे मिटटी खोद रहीं थीं वहाँ पर स्याऊ-सेहे की माँद थी। मिटटी खोदते समय ननद के हाथ से सेई का बच्चा मर गया। तब स्याऊ माता बोली- तूने मेरे बच्चे को मारा है, इसलिये मैं तेरी कोख को बाँध दूँगी । तब ननद ने अपनी सातों भाभियों से कहा कि- मेरे बदले में तुम में से कोई अपनी कोख बँधा लो। छह भाभियों ने अपनी कोख बँधवाने से इन्कार कर दिया लेकिन सबसे छोटी (सातवीं) भाभी सोचने लगी कि यह तो मेरी इकलौती ननद है।
और अगर इसकी कोख बँध जायेगी तो इसका वैवाहिक जीवन कैसे कटेगा ? लेकिन अगर मैं अपनी कोख बँधा लूगी तो कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि। मेरी जो छह जेठानी हैं, उनकी सन्तान होने से वंश तो चलता ही रहेगा। ऐसा सोचकर उस सबसे छोटी (सातवीं) भाभी ने ननद के बदले में अपनी कोख बँधवा ली। अब तो उस छोटी बहू के जो भी बच्चा होता, वह पैदा होने के सातवें दिन ही मर जाता। इससे दुखी होकर उसने एक पण्डित को बुलाया और उससे पूछा कि क्या इस समस्या का कोई समाधान है? तब पण्डित ने बताया कि- काली गाय- स्याहू माता की भायली है इसलिये तुम काली गाय की सेवा किया करो।
तुम्हारी सेवा से प्रसन्न होकर जब काली गाय तुमसे वरदान मागने को कहे तो तुम कहना कि हे गाय माता, तुम अपनी भायली से कहकर मेरी कोख खुलवा दो। फिर जब तुम्हारी कोख खुल जायेगी तो तुम्हारा बच्चा जियेगा। तब बहू ने वैसा ही करने का निश्चय किया। इसके बाद से वह छोटी बहू प्रातःकाल ही उठकर चुपचाप काली गाय के नीचे सफाई आदि कर जाती और चारा-पानी रख जाती। जब कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन गाय ने सोचा कि आज-कल कौन मेरी सेवा कर रहा है। सो अब देखूंगी। ऐसा सोचकर अगले दिन गाय सुबह खूब तडके ही उठ गई और देखती है कि- वह छोटी बहू उसकी सेवा कर रही है।
गाय माता ने प्रसन्न होकर कहा कि- बता, तुझे किस चीज की इच्छा है ? तब उसने कहा। कि- स्याऊ माता तुम्हारी भायली है और उसने मेरी कोख बाँध रखी है, तुम उससे कहकर मेरी कोख को खुलवा दो। गाय माता ने कहा- अच्छा ऐसा ही होगा। अब तो गाय माता उस छोटी बहू को साथ में लेकर अपनी भायली से मिलने के लिये चली जो कि सात समुद्र के पार रहती थी। रास्ते में कड़ी धूप पड़ रही थी सो वे दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गई। उस पेड पर गरुड पक्षी का बच्चा बैठा था। थोडी देर में एक साँप आया और उस बच्चे को डसने लगा ! तब उस छोटो बहू ने साप को मारकर मिट्टी के नीचे दबा दिया और बच्चों को बचा लिया।
थोडी देर में उस बच्चे की माता गरुड़ आई तो वहां पर खून पहा हुआ देखकर उस छोटी बहू को चोंच मारने लगी। तब बहू ने कहा- मैंने तेरे बच्चे को नहीं मारा है वल्कि एक साँप तेरे बच्चे को डसने के लिये आया था। तो मैंने उस साँप को मारकर तेरे बच्चे की रक्षा की है। तब उस माता गरुड़ ने कहा कि बोल, तू क्या माँगती है? बहू बोली कि- सात समुद्रपार स्याउ माता रहती है। तुम हमें उसके पास पहुँचा दो तब गरुड माता ने उन दोनों को अपनी पीठ पर बैठा लिया और तेज गति से उडकर उन्हें स्याउ माता के पास में पहुँचा दिया। स्याऊ माता उन्हें देखकर बोली कि आओ बहिन अब तो बहुत दिनों बाद आई हो फिर कहने लागी कि- मेरे सिर में जुए पड गई हैं। उन्हे निकाल दो तब उस बहू ने सलाई से सारी जुए निकाल दी।
इस पर स्याऊ माता प्रसन्न होकर बालों किन तूने मेरे सिर में बहुत सलाई डाली हैं। इसलिये तेरे सात बेटे और बहू होंगे तब उस छोटी बहू ने कहा कि मेरे तो एक भी बेटा नहीं है। तो फिर सात बेटे कहाँ से होगा? इस पर स्याउ माता बोली कि वचन दिया है। यदि वचन से फिरू तो धोबी के कुण्ड पर कंकरी होऊ। तब बहू ने कहा कि मेरी कोख तो तुम्हारे पास में बन्द पडी है यह सुन स्याउ माता बोली कि- तूने मुझे ठग लिया। वैसे तो में तेरी कोख नहीं खोलती लेकिन अब खोलनी पड़ेगी जा तुझे अपने घर पर सात बेटे और सात बहुये मिलेंगी। तेरा घर-परिवार सदा सूखी! रहेगा। तू घर जाकर अंजुमन करियो। सात अहोई बनाकर सात कढाई करियो। इससे तेरी सन्तान सदा ( सुखी रहेगी और तरक्की करेगी )
फिर वह स्याउ माता को प्रणाम करके गाय माता के साथ मे वापस आ गयी। अपने घर पहुच कर उसने देखा कि सात बहुये बैठी हुई है। यह देखकर वह बहुत प्रसन्न हुई और वह सात अहोई बनाई। फिर सात प्रकार की कड़ाही करके उजमन किया। रात के समय जेठानियाँ कहने लगीं कि- जल्दी से पूजा कर लो यदि छोटी बहू ने हमें पूजा करते हुये देख लिया तो वह अपने बच्चों को याद करके रोने लगेगी। फिर थोडी देर बाद उन्होंने अपने बच्चों से कहा कि- अपनी चाची के घर पर देखकर आओ कि आज वह अभी तक रोई क्यों नहीं है ? बच्चों ने जाकर देखा और लौटकर बताया कि- चाची के घर तो खूब उजमन हो रहा है। यह सुनकर छहों जेठानियाँ दौडी-दौडी उसके घर गई और पूछने लगीं कि- तूने अपनी कोख कैसे छूड़ाई और तेरे इतने बेटे-बहू कैसे हुये ?
तब छोटी बहू ने बताया कि- उस समय तुमने तो अपनी कोख बँधाई नहीं थी सो मैंने अपनी कोख बँधवा ली थी। तब मैंने गाय माता की सेवा की और उनके कहने से स्याऊ माता ने मेरी कोख खोल दी। उनके आशीर्वाद से ही मेरे इतने बेटे- बहू हुये हैं। हे स्याऊ माता! आपने बहू को जैसा फल दिया, वैसा ही सबको देना। जिस प्रकार से बहु की कोख खोली, उसी प्रकार से हमारी भी खोलना। इस कथा को कहने वालों और सुनने वालों की कोख खोलना। सारे परिवार की कोख खोंलना। हम सबकी सन्तान को सदबुद्धि देना और खूब होशियार बनाना। हमारी सन्तान को सभी प्रकार की विद्या और धन प्रदान करना। हमारी सन्तान को सुख-समृद्धि प्रदान करना।
