नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2026 में इस बार आषाढ़ पूर्णिमा कब मनाई जाएगी, पूजा की सही तिथि क्या होगी, पूजा करने की विधि क्या रहेगी और इस दिन क्या करना चाहिए क्या नही करना चाहिए आईये जानते हैं।
Ashadha Purnima 2026 Date Time: हिन्दू धर्म में पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व बताया है प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पर्णिमा तिथि पॅड़ती हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पर्णिमा ‘के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। गुरु पूर्णिमा को व्यास पृर्णिमा भी कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व जीवन में गुरु के विशिष्ट स्थान को दर्शाता है। आषाढ़ पूर्णिमा दिन पवित्र नदी में स्रान और गरीबों ग दान-पुण्य करने का महत्व है
इसूके अलावा आषाढ़ पूर्णिमा तिथि पर व्रत और भगवान सत्यनारायण की पजा और कथा करने का विशेष महत्व हैं। ऐसा करने से परिवार में सुख और समुद्धि आती है। इसके आलावा पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा पजा से कंडली का चंद्र दोष दूर होगा। पूर्णिमा के दिन रात के समय मेंधन की देवीं माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन में वृद्ध होती है।
आषाढ़ पूर्णिमा पूजा विधि
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से स्रान करके साफ़ कपड़े धारण कें। फिर, व्रत का संकल्प लें। अब स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दे। अब घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करक एक चौकी पर लाल रंग का वस्तल बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु जी और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
Ashadha Purnima के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। उन्हें धूप, दीप, फूल, फल, चंदन और मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन ऊं नमोः भगवते वासदेवाय नम: के मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करं. सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। शाम को चंद्रमा निकलने पर, चंद्रमा को दूध, जल, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। आषाढ़ पूर्णिमा Ashadha Purnima को गुरु पर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है।
इसलिए इस दिन अपने ग्रुओं का सम्मान करना न भूलें। यदि संभव हो तो गुरु के पास जाकर टक्षिणा अर्पित करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। इसलिए आप अपनी इच्छा और सामर्थ्य अनुसार गरीबो को दान दक्षिणा अवश्य दे।
Ashadha Purnima 2026 Date Time: जुलाई 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा कब है?
| व्रत त्यौहार के नाम | दिन व दिनांक |
|---|---|
| आषाढ़ पूर्णिमा व्रत | 29 जुलाई २०२६ – बुधवार |
| पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगी | 28 जुलाई 2026 – बुधवार, रात्रि 18:18 बजे |
| पूर्णिमा तिथि की समाप्ति होगी | 29 जुलाई 2026 – गुरुवार, रात्रि 20:07 बजे |
| पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय होगा | 29 जुलाई 2026 – रति, 19:16 बजे |
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन क्या करे क्या नहीं?
धर्म शास्त्रों के अनुसारआशाद आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी में जाना सम्भव नहीं है तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल और उसमे काले तिल मिलाकर स्नान करले इसके किसी जरुरत मंद को अपनी छमता नुसार दान-पुण्य करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। और गुरुओं का सम्मान करें, व्रत रखें। और भगवान सत्यनारायण का पाठ करें। और इस दिन पितरों का तर्पण करना और शाम को पीपल के नीचे घी का दीपक जलाना जरुर चाहिए ऐसा करना भी शुभ माना जाता है।
मान्यता है की आषाढ़ पूर्णिमा के किसी से लडाई-झगडा नहीं करना चाहिए और दिन में देर तक नहीं सोना चाहिए. इसके साथ ही इस दिन बाल, नाखून काटने या काले कपड़े पहनने से भी बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से नकारात्मकता आती है और देवी-देवता रुष्ट हो सकते है साथ ही इस दिन घर को गंदा नहीं रखना चाहिए, इससे घर में नकारात्मकता आती है और धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता
