Adhik Maas 2026: दोस्तों हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व होता है। इस महीने में बहुत से ऐसे काम हैं जिन्हें करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त महीना आता है जिसे अधिक मास कहते हैं। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं। आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में जाने की प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य देव लगभग हर माह में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। लेकिन जिस माह में सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता है। उस माह को मलमास या अधिक मास कहा जाता है। यह माह मलन हो जाता है। यही कारण है कि इसे मलमास के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। ऐसे में सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच में 11 दिन का अंतर आ जाता है। इस अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक महीना अधिक पड़ता है। हिंदू कैलेंडर में हर 3 साल में जुड़े इस एक अतिरिक्त महीने को ही अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। अब आईये जानते है अधिक मास साल 2026 में कब शुरू होगा और कब समाप्त होगा। अधिक मास का क्या महत्व है और अधिक मास में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? क्योंकि बहुत से ऐसे कार्य हैं जो अधिक मास में करना वर्जित बताए गए हैं।
Adhik Maas 2026 Date: अधिक मास कब शुरू और कब समाप्त होगी
दोस्तों आपको बता दें कि साल 2026 में अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026 दिन रविवार से होगी और अधिक मास की समाप्ति 15 जून 2026 दिन सोमवार को हो जाएगी। साल 2026 में अधिक मास जेष्ठ महीने के अंदर आएगा। जिससे जेष्ठ माह 30 की बजाय लगभग 58 से 59 दिनों का होगा और साल 13 महीनों का बनेगा। अधिक मास भगवान विष्णु जी को समर्पित होता है और इस महीने में श्री हरि विष्णु जी की भक्ति और आराधना की जाती है।
अधिक मास में क्या करे क्या नहीं
दोस्तों हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व होता है। इस महीने में बहुत से ऐसे काम हैं जिन्हें करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। लेकिन बहुत से ऐसे काम है जिन्हें अधिक मास में भूलकर भी नहीं करना चाहिए। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं कि अधिक मास में ऐसी कौन-कौन से काम है जो हमें भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
अधिक मास में विवाह करना अशुभ माना जाता है। अधिक मास होने की वजह से इस महीने शादी सगाई जैसे मांगलिक कार्यों को करना मना किया गया है। इसके अलावा अधिक मास में मांस मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए। कहते हैं ऐसा करने से व्यक्ति को नर्क की यातनाएं झेलनी पड़ती है। इसके अलावा अधिक मास की अवधि में कोई भी नया कारोबार शुरू नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान कारोबार शुरू करने से उसमें सफलता नहीं मिलती है। इसीलिए इस महीने में भूलकर भी नया व्यवसाय शुरू ना करें। माना जाता है कि अधिक मास (Adhik Maas) में भूल से भी अपने गुरु या गुरु समान व्यक्ति पितृ देव, इष्ट देव या स्वामी ग्रह और संतों का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देवता क्रोधित हो जाते हैं।अधिक मास में मुंडन संस्कार करवाने के लिए भी मना किया गया है क्योंकि यह महीना शुभ कार्यों के लिए वर्जित बताया गया है। इसके अलावा यह महीना पूजा पाठ के लिए विशेष महत्व रखता है। इसलिए एक दिन भी बिना आराधना किए इस महीने में नहीं बिताना चाहिए। अधिक मास में पुण्य कर्मों और पूजा पाठ का फल भी अधिक मिलता है। इसलिए पूजा का नियम इस महीने नहीं छोड़ना चाहिए।
दोस्तों अधिक मास (Adhik Maas 2026) में महिलाओं को अपने बाल नहीं कटवाने चाहिए। माना जाता है कि बाल गंदगी का प्रतीक होते हैं। इसीलिए परम पावन महीने में बाल कटवाने नहीं चाहिए। ऐसा करने से देवता नाराज होते हैं। इस महीने में झूठ, हिंसा, अत्याचार और चोरी आदि जैसे पाप कर्म भी नहीं करने चाहिए। शास्त्रों में ऐसे कार्यों के लिए हमेशा मना किया गया है। विशेष तौर पर अधिक मास में ऐसा कर्म करने का घोर पाप लगता है। दोस्तों मलमास यानी अधिक मास में किसी भी तीर्थ स्थल देवी देवता या पूजनीय नदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहते हैं इस महीने में ऐसा कर्म करने से पाप लगता है। इसके अलावा अधिक मास में तुलसी के पौधे का निरादर नहीं करना चाहिए। इस दौरान तुलसी का पौधा भी अपने घर से बाहर ना निकालें। कहते हैं यह भगवान विष्णु जी का प्रिय समय है और भगवान विष्णु देवी तुलसी के इस रूप में उनके साथ रहते हैं। इसीलिए तुलसी का निरादर इस महीने भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
दोस्तों अधिक मास में निवेश करने से भी बचना चाहिए। बेहतर होगा कि प्रॉपर्टी गहने आदि की खरीदारी आप इस महीने में ना करें। इसके अलावा अधिक मास (Adhik Maas) में गृह निर्माण भी नहीं शुरू करना चाहिए। ऐसा करना भी अशुभ माना जाता है। दोस्तों अधिक मास में किसी भी प्रकार का व्यसन ना करें। इस महीने में मांसाहार से दूर रहें। मांस, शहद, चावल, चावल का मांड, उड़द, राजमा, राई, मसूर, मूली, प्याज, लहसुन, बासी खाना या नशीली पदार्थ से भी दूर रहना चाहिए। इस माह में विवाह, नामकरण, तिलक, मुंडन, यज्ञोपीत, कंचदन, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा या यज्ञ आदि जैसे शुभ कार्य यानी मांगलिक कार्यों को भी नहीं करना चाहिए। इस महीने में वस्त्र, आभूषण, घर, दुकान और वाहन की खरीदारी भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अधिक मास के दौरान कुआ, बोरिंग या तालाब का खनन आदि को भी त्यागना चाहिए। यह सभी काम अधिक मास में वर्जित बताए गए हैं। चलिए अब जानते हैं कि अधिक मास में कौन-कौन से ऐसे काम हैं जो आपको जरूर करने चाहिए।
दोस्तों अधिक मास (Adhik Maas 2026) धर्म कर्म के लिए बहुत ही उपयोगी महीना है। अधिक मास के अधिपति देवता भगवान विष्णु जी हैं। इस मास की कथा भगवान विष्णु जी के अवतार नरसिंह भगवान और श्री कृष्ण जी से जुड़ी है। इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस महीने भगवान विष्णु जी की पूजा विधिवत रूप से करना बेहद ही फलदाई माना गया है। इस मास में श्रीमद् भागवत गीता श्री राम कथा भगवान विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत का पाठ करना या गीता के पुरुषोत्तम नाम के 14 अध्याय का नित्य अर्थ सहित पाठ करना चाहिए। यह सब नहीं कर सकते तो आप सिर्फ ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप 108 बार जरूर करना चाहिए।
इस माह में जप और तप के अलावा व्रत का भी विशेष महत्व है। इस पूरे मास में एक ही समय भोजन करना चाहिए जो कि आध्यात्मिक और सेहत की दृष्टि से उत्तम रहता है। भोजन में गेहूं, चावल, जौ, मूंग, तिल, बथुआ, मटर, चौलाई, कढ़ी, केला, दूध, दही, आम, हरे पत्ते की सब्जी, जीरा, सोंठ, नमक, इमली, पान, सुपारी, कटहल, शहतूत, मेथी आदि खाने का विधान है। इस माह में दीप, दान और ध्वजा दान करने का भी बहुत अधिक महत्व बतलाया गया है। इस माह में दान दक्षिणा का कार्य पूर्ण फलदाई रहता है। पुरुषोत्तम मास में स्नान पूजन, अनुष्ठान और दान करने का अपना ही महत्व होता है। ऐसा करने से हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। इसके अलावा इस माह में विशेषकर रोग मुक्ति के लिए अनुष्ठान ऋण चुकाने का कार्य, संतान के जन्म संबंधी कार्य, गर्भाधान जैसे संस्कार किया जा सकते हैं। इस माह में यात्रा करना, साझेदारी के कार्य करना, मुकदमा लगाना, बीज बोना, वृक्ष लगाना, दान देना, सार्वजनिक हित के कार्य, सेवा कार्य करने में किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगता है।
