नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2025 में भाद्रपद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी है? यानी श्राद्ध पूर्णिमा कब है? और पूजा की सही तिथि क्या होगी, और पूजा करने की विधि क्या रहेगी और चंदोदय का समय कब रहेगा।
Bhadrapada Purnima Kab Hai 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा तिथि पड़ती है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा भाद्रपद पूणिमा के नाम से जानी जाती है। इस पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष अनुषठान किए जाते हैं। इस पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा, शिव पार्वती पूजा और चंद्रमा पूजा कार्य संपन्न होते हैं। इसके अलावा इस दिन से पितरों को याद करते हुए श्राद्ध कर्म भी शुरू हो जाते हैं। इसलिए इसे श्राद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि भादो पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से जातक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा दोस्तों भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उमा महेश्वर का व्रत भी रखा जाता है। यह व्रत रखने से जातक को कई लाभ प्राप्त होते हैं। इस व्रत में भगवान शिव जी और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। और उनकी कृपा से जातक के सभी कार्य बनते हैं। करियर में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। संतान प्राप्ति और संतान कल्याण के लिए भी यह व्रत विशेष लाभकारी होता है। जिस विशेष कामना की पूर्ति के लिए यह व्रत किया जाता है, वह जल्दी पूरी हो जाती है। दोस्तों, अब जानते हैं भाद्र पूर्णिमा की पूजा विधि के बारे में।
भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि
भाद्रपद पूर्णिमा की पूजा में सुबह जल्दी उठकर स्नाना आदि करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय अपने दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल, कुछ दक्षिणा लें। अब अपना नाम,।अपना गोत्र, आज की तारीख, अपने शहर का नाम और जिला बोलें। अब आप यह व्रत जिस भी इच्छा या कामना के लिए रख रहे हैं, वह भी बोले और पूजा शुरू करे ।
पूजा स्थल में सबसे पहले सभी देवी देवताओं का गंगाजल से अभिषेक करें। पूर्णिमा के पावन दिन पर भगवान विष्णु जी की पूजा अर्चना करने का
विशेष महत्व होता है। इस दिन विष्णु भगवान जी के साथ ही माता लक्ष्मी जी की भी पूजा अर्चना करें। अब भगवान विष्णुजी को भोग लगाएं। भगवान विष्णु जी के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णुजी भोग स्वीकार नहीं करते। इसके अलावा ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं। भगवान विष्णु जी और माता।लक्ष्मी जी की आरती करें। पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता।है।
चंद्रोदय होने पर जल में कच्चा दूध, चावल और चीनी मिला लें। अब ओम सोम सोम हे नमः मंत्र का जाप करते हुए चंद्रमा को।अग्र दें। ध्यान रखें कि अग्र दते समय जल।के छींटे आपके पैरों में ना पड़े। मन मेंके छींटे आपके पैरों में ना पड़े। मन में पूरी सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ।अग्र दें। यदि आपके घर के आसपास गाय हैं तो गाय को भी भोजन जरूर कराएं।
गाय को भोजन कराने से कई तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा इस दिन दान करने का भी काफी महत्व है। इस दिन साधक अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और धन आदि का भी दान अवश्य करें।
भाद्रपद पूर्णिमा २०२५ दिन व तारीख – Bhadrapda Purnima Kab Hai 2025
| त्योहार का नाम | दिन व तारीख |
| भाद्रपद पूर्णिमा कब है | 07 सितंबर २०25 दिन रविवार के दिन मनाई जाएगी। |
| भाद्रपद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी | 07 सितंबर 2025 को देर रात 1:41 पर |
| भाद्रपद पूर्णिमा तिथि की समाप्ति होगी | 07 सितंबर को रात्रि 1 1:38 पर |
| चंद्रोदय होगा | शाम को 6:26 पर |
| चंद्रमा की पूजा | शाम को 6:26 के बाद ही करें |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:44 से 3:15 तक |
| गोधुरी मुहर्त | शाम 6:36 से 6:58 तक |
