मार्च 2026 में चैत्र अमावस्या कब है l Chaitra Amavasya 2026 Kab Hai

Chaitra Amavasya 2026 Kab: हिंदी पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या के नाम से जाना जाता है या कहा जाता है। अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान दान तथा धार्मिक कार्य की जाती है। हर अमावस्या की तरह ही चैत्र अमावस्या के दिन भी पूर्वजों के लिए पूजन और तर्पण करने का महत्व है। मान्यता है कि चैत्र अमावस्या के दिन पितरों की मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत अवश्य करने चाहिए। चैत्र अमावस्या के दिन नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को अर्घ देने के बाद पितरों का तर्पण करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करना चाहिए और गरीबों को दान दक्षिणा देना चाहिए। चैत्र अमावस्या के दिन अन्नदान, गौ दान, स्वर्ण दान और वस्त्र आदि का दान करना चाहिए।

पितरों का श्राद्ध करने के बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन जरूर कराना चाहिए तथा अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए और शनि देव को नीले फूल और सरसों के तेल का भी दीपक जलाना चाहिए। अब हम जान लेते हैं चैत्र अमावस्या के करने की विधि को जो कि इस प्रकार है। चैत्र अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव ना हो सके तो आप घर पर भी स्नान करने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके पश्चात भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल भरकर उन्हें अर्घ दें। इसके पश्चात अपने सामर्थ्य अनुसार अनाज और वस्त्र का दान करें। दोस्तों अब आईये जानते है साल 2026 में चैत्र अमावस्या कब है (Chaitra Amavasya 2026 Kab)

2026 में चैत्र अमावस्या कब है l Chaitra Amavasya 2026 Kab Hai

चैत्र अमावस्या चैत्र माह के कृष्ण में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहते है। जो मार्च 2026 में चैत्र अमावस्या 19 मार्च को मनाई जाएगी।

  • साल 2026 में चैत्र अमावस्या -19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को है।
  • अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी -18 मार्च 2026 की सुबह 8:25 पर।
  • और अमावस्या तिथि समाप्ति होगी – 19 मार्च की सुबह 6:52 पर।

चैत्र अमावस्या पूजा कैसे करें

चैत्र अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर घर पर स्नान कर रहे हैं तो नहाने का पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए इसके बाद अनाज वस्त्र आंवला कंबल व घी आदि का दान करना चाहिए गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए पितरों का तर्पण करना चाहिए।

अमावस्या की तिथि पर अगर पितरों को प्रसन्न करना है तो उनका तर्पण करना चाहिए और पितरों को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार के उपाय करने चाहिए क्योंकि पितरों का अमा तर्पण करना अमावस्या के दिन बहुत ही शुभ माना जाता है इस दिन पित्रों को तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है पितृ दोष समाप्त हो जाता है

चैत्र अमावस्या पर जरुर करे यह उपाय

  • चैत्र अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में चल रही परेशानियों से छुटकारा मिलता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु भगवान भोलेनाथ माता पार्वती एवं माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। इससे आपके जीवन में आ रही सारी परेशानियां दूर हो जाएगी और सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।
  • मान्यता है कि अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
  • लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए इस दिन मीठे जल से मीठे जल में दूध मिला दें और दूध मिलाकर इसे चढ़ाएं क्योंकि इस दिन पीपल के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। पूजन के बाद पीपल की यथाशक्ति परिक्रमा करें जितना बार भी कर सकते हैं परिक्रमा करें और जीवन में आने वाली सभी समस्याएं को खत्म करने के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
  • इस दिन अन्न दूध फल चावल तिल आंवला इत्यादि का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है गरीबों साधु महात्मा तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए स्नान दान आदि के अलावा इस दिन पितरों का तर्पण करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
  • अमावस्या के दिन जल में तील मिलाकर उसे दक्षिण दिशा की ओर तर्पण करें ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
  • शास्त्रों में बताया गया है कि अगर हम किसी नदी में स्नान नहीं करने जा पा रहे हैं। तो घर पर पानी में साधारण पानी में गंगा जल मिलाकर उसे गंगा मां बना ले गंगा के पवित्र जल में स्नान करें और तीर्थ को ध्यान में करते हुए गंगा जी को याद करते हुए गंगा का नाम लेते हुए हर हर गंगे बोलते हुए स्नान करें उसके बाद सूर्य को अर्घ अर्पित करें।
  • इसके लिए आपको तांबे के लोटे में जल भरना है और सूर्य देव को जल चढ़ाना है ऐसा करने से भी तीर्थ और नदी स्नान के बराबर पुण्य फल मिल जाता है स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को अनाज और गौशाला में धन हरी घास इत्यादि दान करें।
  • इस दिन घर में दोपहर करीब 12 बजे गाय के गोबर से बने हुए कंडे जला ले और उसके अंगारों पर गुड़ घी डालें पित्रों का ध्यान करें और हथेली में जल लेकर और अंगूठे की ओर से पितरों को अर्घ अर्पित करें किसी शिव मंदिर में दीपक जलाएं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
  • चैत्र अमावस्या के दिन किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी के सामने घी का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदर कांड का पाठ करें।
  • मान्यता है कि अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
  • लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए इस दिन मीठे जल से मीठे जल में दूध मिला दें और दूध मिलाकर इसे चढ़ाएं क्योंकि इस दिन पीपल के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है पूजन के बाद पीपल की यथाशक्ति परिक्रमा करें जितना बार भी कर सकते हैं परिक्रमा करें। और जीवन में आने वाली सभी समस्याएं को खत्म करने के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
  • इस दिन अन्न दूध फल चावल तिल आंवला इत्यादि का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है गरीबों साधु महात्मा तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए स्नान दान आदि के अलावा इस दिन पितरों का तर्पण करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
  • अमावस्या के दिन जल में तील मिलाकर उसे दक्षिण दिशा की ओर तर्पण करें ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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