मित्रो नमस्कार मैं हु अजीत यादव इस लेख के माध्यम से मैंने आप को बताया है कि साल 2025 में कार्तिक मास में पड़ने वाला छठ का पर्व कब मनाया जाएगा, और छठ पूजा मानाने का महत्त्व क्या है आईये जानने है तो आप को बतादे की
Chhath Puja 2025 Date: छठ पूजा में भगवान सूर्य की उपासना का एक खास पर्व माना जाता है। इस पर्व को सभी व्रतों में सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इस व्रत की लोक प्रियता बहुत तेजी से लगातार बढ़ रही है। यह व्रत न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें लोग दूर-दूर से अपने गांव लौटते हैं और परिवार के साथ मिलकर पूजा में भाग लेते हैं। अब कई कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को रखने लगी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या कुंवारी लड़कियों को छठ पूजा करनी चाहिए?
धार्मिक मान्यता है कि छठ पूजा का पर्व केवल विवाहित महिलाओं के लिए ही उचित माना गया है। इसका मुख्य कारण महाभारत में माता कुंती से जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि जब कुंती कुआरी थी तब वह भगवान सूर्य देव की उपासना की और उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इसलिए इस घटना से यही मालूम पड़ता है कि छठ पूजा केवल विवाहित महिलाओं को ही करना चाहिए।
लेकिन कुआरी लडकिया छठ पूजा में प्रसाद बनाने और पूजा में जितना हो सके उतना व्रती की मदत कर सकती है। जिससे छठ माता प्रसन्न ही नही बल्कि अपना आशीर्वाद दे। इतना ही नहीं बल्कि पुरुष भी यग्योपवित्र के बढ़ी छठ पूजा प्रारम्भ करे। छठ पूजा एक कठिन व्रत माना जाता है जिसमे स्वक्षता का पूरा ध्यान रखना चाहिए। और इस को निर्जल उपवास के साथ सम्पन्न किया जाता है। आप को बतादे की छत पूजा में उचित नियमो का पालन करते हुए पूजा प्रारम्भ करना चाहिए।
आईये जानते है साल २०२५ में कार्तिक छत पूजा कब मनाया जायेगा, और एस दिन भगवान सूर्य देव को सुबह और शाम को अर्घ देने का समय क्या हेगा और नही खाय की शुरुआत कब होगी
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा मुख्य रूप से भगवान सूर्य देव को समर्पित है, इस दिन माताए भगवान् सूर्य देव की पूजा अर्चना करती है मान्यता है की छत पूजा करने से भगवान पुत्र की प्राप्ति होती है, इस पर्व को पुत्रवती महिलाए ही नहीं बल्कि जिनको पुत्र नहीं हो रहा है वो महिलाए भी एस व्रत को करती है। इसके अलावा इस पूजा में स्वास्थ्य, समृधि, और परिवार की भलाई के लिए किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है की जब पांडव जुए में अपना सारा राज पाठ हार गए थे तो उन्हें राज्य से बाहर निकाल दिया गया था तो वः वन वन भटकते हुए भीख मानकर अपना पेट पालते थे, तभी द्रोपदी ने अपना राज पाठ पाने के लिए भगवान् सूर्यदेव और छठी मईया की उपासना की और खोया हुया राज पाठ वापस मिल गया। तब से लेकर आज तक छठ पूजा मानाने की परम्परा चली आ रही है।
हिंदी कैलेंडर के अनुसार छठ पूजा हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आरंभ होता है। और कार्तिक मास की सप्तमी तिथि को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस पर्व की समाप्ति होती है। लेकिन इस पर्व में सबसे मुख्य षष्ठी तिथि को माना जाता है। इन दिनों में भगवान सूर्य देव की पूजा उपासना करने का विधान है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे भविष्य, रोग मुक्त जीवन और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
छठ पूजा 2025 दिन तारीख Chhath Puja 2025 Date Time
| त्योहार | शुभ तिथि |
| छठ पर्व | 28 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार |
| षष्टी तिथि प्रारंभ | 27 अक्टूबर 2025 को सुबह 06:05 बजे |
| षष्टी तिथि समाप्त | 28 अक्टूबर 2025 को सुबह 08:00 बजे |
| शाम का अर्घ | 05:39 मिनट पर |
| सुबह का अर्घ | 06:30 मिनट पर |
