Dasha Mata Vrat 2026: दशामाता व्रत कब है? जाने डेट मुहूर्त, विधि और व्रत का महत्व

नमस्कार मित्रो मैं हु मुकेश यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2026 में दशामाता का व्रत कब रखा जायेगा, और पूजा की सही तिथि क्या होगी, और पूजा करने की विधि क्या है, और दशामाता पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। आइये जानते है।

दशामाता व्रत का महत्व

Dasha Mata Vrat 2026: दशामाता व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जो माता पार्वती को समर्पित होता है। यह व्रत हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि आती है, और पुण्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के आधार पर दशा माता की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अगर जो कोई भक्त दशामाता (Dasha Mata) की पूजा अर्चना साफ शुद्ध मन से पूरे विधि विधान से करता है। तो दशामाता उन्हें आशिर्वाद देती है।

अगर आप नहीं जानते है कि कैसे करते है दशा माता की पूजा और किन विधियों का पालन करने से दशामाता को प्रसन्न करना है तो आइये जानते है।दशामाता का व्रत हर साल चैत्र मास की कृष्णपक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कपर मनुष्य का बुरा समय दूर हो सकता है तथा दशमाता की कृपा सदैव बनी रहती है। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसी मान्यता है जो लोग इस व्रत में किसी भी गरीब व्यक्ति या जरूरतमंदों को दान देता है तो उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। आइये जानते है साल 2026 में दशामाता का व्रत कब रखा जाएगा। 13 या 14 मार्च, जाने पूजा की सही तिथि, पूजा विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त

दशामाता पूजा विधि Dasha Mata Vrat Puja

दशामाता व्रत के दिन जो महिला पहली बार पूजा कर रही है। तो इस बात का जरूर ध्यान रखे कि इस व्रत को शुरू करने के बाद इसे छोड़ा नही जाता है। बल्कि इस व्रत को आजीवन किया जाता है। मान्यता है कि जो महिला दशामाता ( Dasha Mata) का व्रत रख रही है। तो वह महिला सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से साफ सफाई करके घर के किसी कोने में एक दीवार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। फिर स्वास्तिक के पास 10 बिंदियां बनाएं और दशा माता की पूजा के लिए रोली, मौली , सुपारी, चावल, दीप, नैवेद्य, धुप आदि शामिल करें।

इसके अलावा व्रती महिलाये सफेद कच्चा धागा लें। और उसमे 10 गांठ बना लें फिर उसे हल्दी में रंग लें। और दशामाता( Dasha Mata) की पूजा करने के बाद इस धागे को गले में पहन लें। मान्यता है कि इस धागे को पूरे साल गले से नही उतारना चाहिए। और अगले वर्ष जब भी दशामाता का पूजा करे तब पुराने धागे को उतारकर नया धागा पहन लें। इसके बाद दशमाता की पूजा पूरे विधि विधान से करे। और पूजा के अंत मे माता दशा की कथा सुने

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दशामाता माता व्रत के नियम

  • दशामाता व्रत के दिन केवल एक ही समय भोजन किया जाता है और भोजन में केवल केहू के आटे से बनी मीठी पूड़ी खाना चाहिए।
  • इसके अलावा आप सेव, केला, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, टमाटर इत्यादि खा सकते है।
  • जो महिलाये दशामाता का व्रत रखी है वो महिलायें दिन में केवल एक बार सात्विक चीजो का सेवन करे।
  • और भूलकर भी दशामाता व्रत के दिन लहसुन, प्याज का सेवन नही करना चाहिए।
  • और नाही दशामाता व्रत के दिन मांस, मछली, अंडा, मदिरापान नही करना चाहिए।
  • जो महिलाएं दशामाता का व्रत एक बार उठालेते है तो वह महिलाएं यह आजीवन करती है। क्यो की इस व्रत का उद्यापन नहो किया जाता है।

दशामाता माता व्रत पूजा की सामग्री

दशामाता की पूजा करने के लिए पूजा सामग्री निन्न्लिखित है जैसे –

  • चूड़ी
  • बिंदी
  • मेहंदी
  • सिंदूर
  • साबुन
  • कंघा
  • वस्त्र
  • पीपल के 10 पत्ते
  • कच्चा सूत या मौली
  • दीपक
  • घी या तेल
  • अगरबत्ती
  • कपूर
  • रोली,
  • कुमकुम
  • हल्दी
  • चावल (अक्षत)
  • फूल, माला
  • फल
  • गुड़ या मिठाई
  • नारियल
  • पानी का कलश
  • सुपारी
  • पान का पत्ता आदि

दशामाता व्रत 2026 कब है? Dasha Mata Vrat 2026 Date Time

त्योहारदिन व तारीख
दशामाता व्रत 4 मार्च 2026 बुधवार – 14 मार्च 2026 शनिवार तक
दशमी तिथि शुरू होगी13 मार्च सुबह 6:28 बजे तक
दशमी तिथि समाप्त होगी14 मार्च सुबह 8:10 बजे तक

दशामाता माता की कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार – एक राजा था उसकी दो रानियां थी बड़ी रानी के संतान नहीं थी छोटी रानी के पुत्र था राजा छोटी रानी और राजकुमार को बहुत प्यार करता था बड़ी रानी छोटी रानी से छेड़छाड़ करने लगी बड़ी रानी राजकुमार के प्राण हर लेना चाहती थी। एक दिन राजकुमार दौड़ता-दौड़ता बड़ी रानी के चौक में चला गया बड़ी रानी ने राजकुमार के गले में एक काला सांप डाल दिया छोटी रानी दशामाता का व्रत करती थी। राजकुमार दशामाता का ही दिया हुआ था, दशा माता की कृपा से राजकुमार के गले में सांप बिना नुकसान पहुंचाए चला गया। दूसरे दिन बड़ी रानी ने लड्डू में जहर मिलाकर शुक्रवार को खाने के लिए दे दिया, राजकुमार जैसे ही लड्डू खाने लगा तो दशामाता एक दासी का रूप धारण आई और राजकुमार के हाथ से लड्डू छीन लिया।

तब बड़ी रानी का यह बार भी खाली गया रानी को बड़ी चिंता हुई किसी भी तरह से राजकुमार को मारना है। तीसरे दिन जब राजकुमार फिर बड़ी रानी के आंगन में खेलने गया तो रानी ने उसे फिर पकड़ लिया और गहरे कुएं में धकेल दिया क्योंकि कुआं बड़ी रानी के आंगन में था। इसी लिए किसी को भी पता नहीं चला कि राजकुमार कहां गया लेकिन जैसे ही बड़ी रानी ने राजकुमार को कुएं में धकेला तो दशा माता ने उसे बीच में ही रोक लिया। इधर दोपहर हो जाने पर राज कुमार के घर न लौटने पर राजा व छोटी रानी को चिंता सताने लगी दशा माता को भी इस बात की चिंता हुई। राजकुमार को उसके माता-पिता के पास किस प्रकार पहुंचाया जाए। राजकुमार को तलाश करने वाले कर्मचारी निराश होकर बैठ गए और राजा व छोटी रानी पुत्र शोक में रोने लगे।

तब दशा माता ने भिखारी का रूप धारण किया और राजकुमार को गले से लगाया राज द्वार पर पहुंची वह राजकुमार को एक वस्त्र में छिपाए हुए भिक्षा मांगने लगी सिपाहियों ने उसे दुत्कार कर कहा कि तुझे भिक्षा की पड़ी है और यहां राजकुमार खो गया है। सारे लोग दुख और चिंता से व्याकुल हो रहे हैं इस पर दशा माता बोली भाइयों पुण्य का प्रभाव बड़ा ही विचित्र होता है। यदि मुझे भी अच्छा मिल जाए तो संभव है कि खोया हुआ राजकुमार तुम्हें मिल जाए यह कहकर व डेयरी में पैर रखने लगी, सिपाहियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका उसी समय दशा माता ने बालक का पैर वस्तु से बाहर कर दिया सिपाहियों ने समझा कि को और उसके हाथों में है। इसलिए उसे अंदर जाने दिया दशा माता अश्व को लिए भीतर चली गई।

उसने राजकुमार को चौक में छोड़ दिया और वापस चली गईं परंतु रानी ने दशामाता रूपी भिखारिन को देख लिया था उस तरह के खड़ी रहो और तुम कौन हो तुम ने तीन दिन मेरे बेटे को छुपा कर रखा था। तुमने ऐसा क्यों किया तुम्हें मेरे प्रश्न का उत्तर देना होगा दशा माता उसी समय ठहर गई उन्होंने बताया कि मैं तुम्हारे पुत्र की चोरी करने वाली नहीं हूं मैं तो तुम्हारी आराध्य देवी दशा मा आता हूं मैं तुम्हें सचेत करने आई हूं कि बड़ी रानी तुमसे इरशाद रखती है वह तुम्हारे पुत्र के प्राण हर लेना चाहती है। एक बार उसने तुम्हारे पुत्र के गले में काला सांप डाला था जिसे मैंने भगाया दूसरे बार उसने विश्वास लड्डू खिलाने की कोशिश करें जिसे मैंने हाथों से छीन लिया इस बार उसने तुम्हारे राजकुमार को अपने आंगन के कुएं में धकेल दिया था और मैंने उसे बीच पर रोककर उसकी रक्षा की इस समय मैं भी कारण के बीच में तो मैं सचेत करने आई हूं।

यह सुनकर छोटी रानी ने दशामाता के पैरों पर गिर कर क्षमा मांगी छोटी अपने विनती भाव से बोली कि जैसी कृपा आपने मुझ पर दर्शन देकर की है। मैं चाहती हूं कि आप सदैव इस महल में निवास करें मुझसे जो सेवा पूजा होगी मैं करूंगी। इस पर दशा माता बोली कि मैं किसी के घर नहीं रहती हूं जो श्रद्धा-पूर्वक मेरा ध्यान इस स्मरण करता है। मैं उसी के हृदय में निवास करती हूं मैंने तुम्हें साक्षात दर्शन दिए हैं। इसलिए तुम सुहागिनों को बुलाकर उन्हें यथाविधि आदर सत्कार के साथ भोजन कराओ और नगर में ढिंढोरा पिटवा दो कि सभी लोग मेरा डोरा लें और व्रत करें। इतना कहकर दशामाता अंतर्ध्यान हो गए हैं रानी ने अपने राज्य की सौभाग्यवती स्त्रियों को निमंत्रण देकर बुलाया और उस टाइम से लेकर शिरोभूषण संघार तक उनकी यथाविधि के साथ सेवा कर भोजन कराया और दक्षिणा में गहने आदि देकर विदा किया रानी ने अपने राज्य में इन दिनों पटवा दिया कि अब से सब लोग दशा माता का डोरा लिया करेंगे और व्रत किया करेंगे।

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