Dasha Mata Vrat 2026: दशामाता व्रत कब है? जाने डेट मुहूर्त, विधि और व्रत का महत्व

नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2026 में दशामाता का व्रत कब रखा जायेगा, और पूजा की सही तिथि क्या होगी, और पूजा करने की विधि क्या है, और दशामाता पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। आइये जानते है।

दशामाता व्रत का महत्व

Dasha Mata Vrat 2026: दशामाता व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जो माता पार्वती को समर्पित होता है। यह व्रत हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि आती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

हिंदू पौराणिक मान्यताओं के आधार पर दशा माता की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अगर जो कोई भक्त दशामाता (Dasha Mata) की पूजा अर्चना साफ शुद्ध मन से पूरे विधि विधान से करता है। तो दशामाता उन्हें आशिर्वाद देती है। अगर आप नहीं जानते है कि कैसे करते है दशा माता की पूजा और किन विधियों का पालन करने से दशामाता को प्रसन्न करना है तो आइये जानते है।

दशामाता का व्रत हर साल चैत्र मास की कृष्णपक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कपर मनुष्य का बुरा समय दूर हो सकता है तथा दशमाता की कृपा सदैव बनी रहती है। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

ऐसी मान्यता है जो लोग इस व्रत में किसी भी गरीब व्यक्ति या जरूरतमंदों को दान देता है तो उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। आइये जानते है साल 2026 में दशामाता का व्रत कब रखा जाएगा। 13 या 14 मार्च, जाने पूजा की सही तिथि, पूजा विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त

दशामाता पूजा विधि Dasha Mata Vrat Puja

दशामाता व्रत के दिन जो महिला पहली बार पूजा कर रही है। तो इस बात का जरूर ध्यान रखे कि इस व्रत को शुरू करने के बाद इसे छोड़ा नही जाता है। बल्कि इस व्रत को आजीवन किया जाता है। मान्यता है कि जो महिला दशामाता ( Dasha Mata) का व्रत रख रही है। तो वह महिला सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से साफ सफाई करके घर के किसी कोने में एक दीवार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।

फिर स्वास्तिक के पास 10 बिंदियां बनाएं और दशा माता की पूजा के लिए रोली, मौली , सुपारी, चावल, दीप, नैवेद्य, धुप आदि शामिल करें। इसके अलावा व्रती महिलाये सफेद कच्चा धागा लें। और उसमे 10 गांठ बना लें फिर उसे हल्दी में रंग लें। और दशामाता( Dasha Mata) की पूजा करने के बाद इस धागे को गले में पहन लें।

मान्यता है कि इस धागे को पूरे साल गले से नही उतारना चाहिए। और अगले वर्ष जब भी दशामाता का पूजा करे तब पुराने धागे को उतारकर नया धागा पहन लें। इसके बाद दशमाता की पूजा पूरे विधि विधान से करे। और पूजा के अंत मे माता दशा की कथा सुने

दशामाता माता व्रत के नियम

  • दशामाता व्रत के दिन केवल एक ही समय भोजन किया जाता है और भोजन में केवल केहू के आटे से बनी मीठी पूड़ी खाना चाहिए।
  • इसके अलावा आप सेव, केला, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, टमाटर इत्यादि खा सकते है।
  • जो महिलाये दशामाता का व्रत रखी है वो महिलायें दिन में केवल एक बार सात्विक चीजो का सेवन करे।
  • और भूलकर भी दशामाता व्रत के दिन लहसुन, प्याज का सेवन नही करना चाहिए।
  • और नाही दशामाता व्रत के दिन मांस, मछली, अंडा, मदिरापान नही करना चाहिए।
  • जो महिलाएं दशामाता का व्रत एक बार उठालेते है तो वह महिलाएं यह आजीवन करती है। क्यो की इस व्रत का उद्यापन नहो किया जाता है।

दशामाता व्रत 2026 कब है? Dasha Mata Vrat 2026

त्योहारदिन व तारीख
दशामाता व्रत 4 मार्च 2026 बुधवार – 14 मार्च 2026 शनिवार तक
दशमी तिथि शुरू होगी13 मार्च सुबह 6:28 बजे तक
दशमी तिथि समाप्त होगी14 मार्च सुबह 8:10 बजे तक

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