दिवाली कब है 2026 | Diwali 2026 Date Time Shubh Muhurat | नोट करले लक्ष्मी, गणेश पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व

Diwali 2026 Date Time

Diwali 2026 Date Time: दिवाली भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्यौहार है जो हर साल पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली का पर्व विशेष रूप से भगवान राम के अयोध्या लौटने और मां लक्ष्मी के आगमन व महालक्ष्मी पूजा के रूप में मनाया जाता है। दिवाली का महत्व कई धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है हिंदू धर्म ने इसे श्रीराम के अयोध्या लौटने और उनके घर पर दीप जलाकर स्वागत करने के बन के रूप में मनाते हैं। भगवान राम माता सीता भाई लक्ष्मण और हनुमान जी 14 साल का वनवास समाप्त करके अयोध्या लौटे थे। और अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था इसके अलावा दिवाली का पर्व देवी लक्ष्मी जी के साथ भी है माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आई और अपने भक्तों के घरों में सुख समृद्धि और धन का वास करती हैं दिवाली का पर्व पाच दिन तक मनाया जाता है।

हर दिन की पूजा और महत्व अलग-अलग होता है। पहला दिन धनतेरस होता है। जब लोग नए बर्तन आभूषण या धातु खरीदते हैं इसे समृद्धि के आगमन के रूप में मनाया जाता है। दूसरा दिन नरक चतुर्दशी दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी या काली चौदस कहते हैं। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है लोग उपकन करके स्नान करते हैं ताकि बुरी नकारात्मकता दूर हो सके तीसरा दिन दिवाली या दीपावली यह दिवाली का मुख्य दिन होता है। इस दिन को लक्ष्मी पूजा के रूप में मनाते हैं घरों को सजाया जाता है दीपक जलाते हैं। और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं लोग अपने घरों को स्वक्ष और सुंदर बनाते हैं ताकि देवी लक्ष्मी का आगमन हो सके। चौथा दिन गोवर्धन पूजा पूजा होती है जो भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी है।

इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं। और पकवान बनाते हैं। पांचवा दिन दूध पांचवें दिन भाई दूध मनाते हैं। जब बहने अपने भाइयों को तिलक करके उन्हें लंबी उम्र और सफलता की दुआ देती हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली का त्यौहार हमें यह सिखाता है कि जीवन में अंधकार और बुराई से लड़ा जाए और सत्य और अच्छाई व प्यार का पालन किया जाए। यही वह समय होता है जब हम अपने घरों को सजाकर खुशी और समृद्धि की कामना करते हैं। दोस्तों लेकिन इस बार दिवाली के पर्व की डेट को लेकर लोगों में कंफ्यूज बना हुआ है। कि साल 2026 में दिवाली (Diwali) कब मनाई जाएगी। 08 या 09 नवम्बर, जाने पूजा की सही डेट, पूजा करने की विधि और इस दिन लक्ष्मी पूजा की सही समय क्या है जानिए सम्पूर्ण जानकारी।

2026 में दिवाली कब है? Diwali 2026 Date Time Shubh Muhurat

साल में 2026 में, दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है।

  • लक्मी पूजा मुहूर्त- 17:55 से 19:51 तक
  • अवधि: 1 घंटा 55 मिनट
  • प्रदोष काल: 17:31 से 20:08 तक
  • वृषभ काल: 17:55 से 19:51 तक
  • महानिशीथ काल मुहूर्त-
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 23:38 से 24:31 तक
  • अवधि: 0 घंटा 52 मिनट
  • महानिशीथ काल: 23:38 से 24:31 तक
  • सिंह काल: 24:27 से 26:45 तक
  • शुभ चौघड़िया मुहूर्त
  • प्रातःकाल (अमृत): 11:29 से 12:04 तक
  • अपराह्न (शुभ): 13:26 से 14:48 तक
  • सायंकाल (शुभ, अमृत, चल): 17:31 से 22:26 तक
  • रात्रि (लाभ): 25:43 से 27:21 तक
  • उषाकाल (शुभ): 29:00 से 30:38 तक

दिवाली का महत्व

दीपावली का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान प ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लोटे थे। जिसकी खुशी में अयोध्या वासियों ने घर-घर दीप जलाए थे। वैसे तो दिवाली का पर्व पांच दिन तक मनाया जाता है जो कि इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। और दूसरे दिन नरक चतुर्टशी, तीसरे दिन दीवाली चोथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवे दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

हर दिन का अपना अलग महत्व है इन पांच दिन तक लोग अपने घर-आंगन में दीप जलाते है और खुशियां मनाते हैं। हिन्दू धर्म शस्त्रों के अनुसार दिवाली ( Diwali) के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा करने से मुख्य रूप से धन, समृद्धि, और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। और दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। माना जाता है कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा से बीमारियों से छुटकारा मिलता है और जीवन स्वस्थ रहता है।

दीवाली पूजा विधि – Diwali Puja Vidhi

दीवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसलिए इस पूजा को सफल बनाने के लिए सबसे पहले घर या मंदिर की अच्छे से साफ-सफाई करके पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करे। इसके बाद पूजा करने के लिए सबसे पहले एक चौकी लेकर उसपर एक साफ़ लाल कपडा बिछाये। इसके बाद उस चोकी के बीच में भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी की मर्तिया रखे। ध्यान रखें कि माता लक्ष्मी को भगवान गणेश जी के दाहिने स्थापित करे। और माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी प्रतिमा का मुख पूर्व या पक्षिम दिशा की तरफ ही रहे। इसके अलावा दीवाली (Diwali) पर्व के दिन भगवान कुबेर, माता सरस्वती और कलश की भी स्थापना करनी चाहिए।

अब हाथ में लाल या पीले फूल लेकर भगवान गणेश जी का ध्यान करें और उनके बीज मंत्र -ऊँ गं गणपतये नमःका जाप करे। माता लक्ष्मी को लाल सिंदूर का तिलक लगाएं और माता लक्ष्मी के श्री सूक्त मंत्र का पाठ कों। इसके साथ देवी सरस्वती, माता काली, भगवान विष्णु और भगवान कुबेर की पूजा भी विधि विधान से करे। इसके बाद खीर, बताशे, और मिठाई का भोग लगाए। अब धुप अगरबत्ती और दिए से भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी की आरती करें। लेकिन दिवाली (Diwali) की पूजा पूरे परिवार को एक साथ मिलकर करना चाहिए। इसके बाद खुद आरती लेकर पूरे परिवार को आरती लेना चाहिए।

दिवाली व्रत कथा

दोस्तों- एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था ब्राह्मण की एक बेटी थी ब्राह्मण की बेटी रोजाना पीपल के पेड़ को सींचने जाती थी। उस पेड़ में से रोजाना एक लड़की निकलती और वह ब्राह्मण की बेटी से कहती की तुम मेरी सहेली बन जाओ, तब ब्राह्मण की बेटी ने एक दिन उसको कहा कि मैं अपने पिताजी से पूछ के ही तुम्हारी सहेली बनूंगी। एक बार मैं अपने पिताजी से पूछ लेती हूं ब्राह्मण की बेटी अपने घर आई और अपने पिताजी से बोली कि पिताजी पीपल के पेड़ से एक लड़की निकलती है, और वह रोजाना मुझे कहती है कि मेरी सहेली बन जाओ। तब ब्राह्मण ने कहा बेटा सहेली बनने के लिए ही तो बोल रही है कोई बात नहीं तुम उसकी सहेली बन जाओ। अब ब्राह्मण की लड़की जाती है अगले दिन जैसे ही पीपल सींचती है, तब पीपल से एक लड़की निकली और फिर बोलती है कि क्या तुम मेरी सहेली बनोगी तो ब्राह्मण की बेटी कहती है कि हां मैं तुम्हारी सहेली बनूंगी दोनों सहेली बन जाती हैं।

अब वो छोटी सी लड़की कहती है कि तुम मेरे घर भोजन के लिए आना मैं तुम्हें आने के लिए निमंत्रण दे रही हूं। ब्राह्मण की बेटी अपने घर आकर पिताजी से कहती है। कि पिताजी मेरी सहेली ने मुझे अपने घर निमंत्रण दिया है भोजन के लिए बुलाया है ब्राह्मण कहता है ठीक है बेटी चली जाओ ब्राह्मण की बेटी जैसे ही उसके घर जाती है। वो छोटी सी लड़की तो महालक्ष्मी थी जाते ही ब्राह्मण की बेटी को सोने की चौकी पर बिठा है चांदी के बर्तनों में खाना परोस है 5 भोग खिलाती है। जाते समय बहुमूल्य रतन शाल दसाल ओड़कर अपने सखी को विदा करती है विदा करते समय महालक्ष्मी जी ब्राह्मण की बेटी को कहती हैं कि सखी कल मैं तुम्हारे घर जीवने आऊंगी यह सुनकर ब्राह्मण की बेटी थोड़ा उदास हो जाती है। लेकिन कहती है ठीक है कल तुम मेरे घर जिमनेमिक पिताजी मेरी सहेली ने मेरा बहुत आदर सत्कार किया सोने की चौकी पर बिठाया 56 भोग कराए और खूब सारा मान सम्मान मुझे दिया लेकिन अब कल मेरी सहेली मेरे घर खाना खाने आएगी मेरे घर जीवने आएगी मैं उसका आदर सत्कार कैसे करूंगी मैं उसको कैसे संतुष्ट करूंगी यही सोचकर मैं परेशान हूं।

तब ब्राह्मण कहता है कोई बात नहीं बेटा जैसा हमसे बन पड़ेगा वैसा हम करेंगे तुम नहा धो के पूरे घर को साफ कर लो रसोई में चौका लगा लो और एक लड्डू लेके रसोई में बैठ जाना लड़की ऐसा ही करती है। पूरे घर को साफ करके किचन में चौका वका लगा के एक लड्डू लेके आंगन में बैठ जाती है। उसी समय पर आसमान में एक चील रानी का नौलखा हार लेक उड़ रही होती है चील की नजर उस लड्डू प जाती है चील आती है और उस लड़की के हाथ से लड्डू छीन के हार उसके हाथ में गिरा के चली जाती है उस हार को लेके लड़की बाजार जाती है और जाके सुनार से कहती है कि मुझे सोने का पटड़ा दे दो सो चांदी के बर्तन दे दो और जो जो चीजें उस लड़की को चाहिए थी ब्राह्मण की बेटी को जो जो सामान चाहिए था वो सारा लेके आ जाती है। उस नौलखे हार को बेचकर खूब सारा सामान लेकर आई आके खूब सारे पकवान बनाए जैसे ही महालक्ष्मी जी आई तो ब्राह्मण की बेटी ने सोने का पटड़ा बिछाया और महालक्ष्मी जी से बैठने के लिए निवेदन किया लक्ष्मी जी ने कहा कि मैं तो किसी भी साहूकार के या राजा महाराजा के घर पर भी नहीं बैठती हूं।

तब ब्राह्मण की बेटी बोली कि सखी तुम मेरी सहेली हो तुम्हें बैठना ही पड़ेगा अगर तुम नहीं बैठो गी तो मेरी चाची ताई सब मेरा मजाक उड़ाएंगे यह सोचकर लक्ष्मी जी उसके पटड़े पर बैठ गई अब लक्ष्मी जी वहां पर बैठी तो पूरा घर अनधन से भर गया ब्राह्मण की बेटी ने महालक्ष्मी को 56 प्रकार के भोग लगाए खूब आदर सत्कार किया और महालक्ष्मी जी की कृपा से ब्राह्मण का घर अनधन से भर गया हे महालक्ष्मी जी जैसे आपने ब्राह्मण की बेटी पर अपनी कृपा की वैसे ही सब पर अपनी कृपा करना और सबके घर को अनधन से भर देना यह थी लक्ष्मी जी की व्रत कथा लक्ष्मी जी की कथा सुनने के बाद हमें गणेश जी की कथा जरूर सुनेंगे तो चलिए गणेश जी की कथा शुरू करते हैं। एक बार एक गांव में गणेश जी का मेला लगा था सारे गांव वाले मेला देखने जा रहे थे तो एक छोटी सी लड़की ने भी जिद कर ली कि मां मैं भी मेला देखने जाऊंगी उसकी मां ने कहा नहीं बेटा मेले में बहुत भीड़ होगी तुम कहीं गिर पड़ जाओगी चोट लग जाएगी। लेकिन लड़की नहीं मानी अब लड़की ने हट कर लिया कि मैं भी मेले में जरूर जाऊंगी उसकी मां ने दो लड्डू और एक घंटी पानी दे दिया और कहा कि लो एक लड्डू और पानी गणेश जी को बचा हुआ लड्डू और पानी तुम ले लेना ठीक है लड़की दो लड्डू और एक घंटी पानी लेकर मेले में चली गई जाके गणेश जी के सामने बैठ गई।

हे गणेश जी महाराज एक लड्डू और पानी तुम्हें बचा हुआ लड्डू और पानी मुझे यही कहते-कहते सुबह से शाम हो गई मेला बिछड़ने लगा सब लोग अपने घर आने लगे लेकिन लड़की वहां से नहीं उठी बोली जब तक गणेश जी लड्डू खाके पानी नहीं पिएंगे तब तक मैं यहां से नहीं जाऊंगी अब गणेश जी ने सोचा कि अगर यह लड़की घर नहीं जाएगी तो इसका दोस्त तुम्हारे सिर लग जाएगा अब गणेश जी तो छोटे से बालक के रूप में आके बोले लो तुम्हारा लड्डू खाया लो तुम्हारा पानी पिया अब मांगो क्या मांगना है लड़की सोचने लगी क्या मांगू अन मांगू धन मांगू खेत मांगू खलिहान मांगू बैल मांगू महल मांगू हवेली मांगू सुहाग मांगूं क्या मांगूं अभी लड़की ये सब सोच ही रही थी तभी छोटा सा लड़का बोला जो जो तुमने सोचा है वो सब हो जाएगा अब तुम अपने घर चली जाओ लड़की घर आ गई घर आते ही मां ने कहा बेटा इतनी देर कहां लगा दी तबल की बोली मां आपने ही तो कहा था कि गणेश जी को लड्डू खिला के पानी पिला के आना मैं तो गणेश जी को लड्डू खिला के और पानी पिला के आई हूं जैसे ही लड़की ने अपनी बात पूरी की उसका पूरा घर अनधन से भर गया जो जो लड़की ने सोचा था वह सब कुछ हो गया हे गणेश जी महाराज जैसे आपने उस लड़की की इच्छा पूरी की वैसे ही सबकी इच्छा पूरी करना और सबके घर को अनधन से भर देना इस तरह से हमारी दिवाली की वृत कथा पूर्ण हो जाएगी कथा सुनने के बाद जो खील हमने अपने हाथ में ली है वह हम लक्ष्मी जी के के चरणों में समर्पित कर देंगे

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