Govatsa Dwadashi 2025: नमस्कार दोस्तो इस लेख में जानेगे साल 2025 में गोवत्स द्वादशी कब मनाई मनाई जाएगी आइये जानते है। गोवत्स द्वादशी एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व गायों और उनके बछड़ों की पूजा के लिए समर्पित होता है। और इसे वसु बारस या नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग गायों को स्नान कराकर उनके माथे पर सिंदूर लगाते हैं। और उन्हें चमकीले कपड़ों और फूलों की माला से सजाते हैं। और उनकी पूजा अर्चना करते है। और किसी गरीब असहाय लोगो को अपने समर्थ के अनुसार दान दक्षिणा देना चाहिए।
शास्त्रो में बतलाया गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि के दिन गायों और उनके बछड़ों की पूजा करने से संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। क्योकि गायों को हिंदू धर्म में एक पवित्र और पूजनीय पशु माना जाता है। गायों की पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। गोवत्स द्वादशी का धार्मिक महत्व है और इसे मनाने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान और पुण्य की प्राप्ति होती है। अब आईये जानते है साल 2025 में गोवत्स द्वादशी कब मनाई जाएगी जानिए सम्पूर्ण जानकरी
Govatsa Dwadashi 2025 की सही तारीख
गोवत्स द्वादशी 2025 में 17 अक्टूबर दिन शुक्रवार को पड़ रही है।
द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी – 17 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:12 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त होगी – 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:18 बजे
प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त – 17 अक्टूबर 2025 शाम 06:05 बजे से रात 08:30 बजे तक रहेगा।
गोवत्स द्वादशी पूजा विधि
गोवत्स द्वादशी पूजा विधि एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन सभी व्रती लोग पूजा के दिन प्रातःकाल स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद गाय और उसके बछड़े को स्नान कराएं और उन्हें नए वस्त्र पहनाकर उनकी पूजा करें और उन्हें फूल, फल, और अन्य भोग अर्पित करें। और पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करें और उनकी स्तुति करें। और किसी गरीब लोगों को दान-पुण्य करें।
गोवत्स द्वादशी के दिन क्या करे क्या नही?
- मान्यता है की गोवत्स द्वादशी के दिन सूर्योदय होने से पहले जो भी लोग किसी नदी या तालाब में स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करके तिल का दान करना चाहिए
- गोवत्स द्वादशी के दिन गाय के बछड़े की पूजा करे और उन्हें धुप द्वीप अर्पित करे
- गोवत्स द्वादशी के दिन गाय और बछड़े की पूजा अर्चना करे और रोटी गुड और हरा चारा खिलाये
- गोवत्स द्वादशी के दिन गाय और बछड़े की पूजा करने से सुख-समृध्धि की प्राप्ति होती है
- इस दिन भूलकर भी गाय के दूध से बनी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए और नाही किसी को दान करनी चाहिए
- एस दिन भूलकर भी किसी को अप्सब्द नही बोलना चाहिए
- और अपन से बडो का अपमान नहीं करना चाहिए
- और इस गाय और बछड़े को मरना पीटना नहीं चाहिए
गोवत्स द्वादशी संक्षित कथा
एक समय की बात है एक साहूकार अपने परिवार के साथ तालाब की पूजा करने गया। और उसने घर की दासी से कहा था कि गेहुंला को पका लेना, लेकिन दासी ने गेहुंला (गाय के बछड़े) को ही पकड़कर पकाने के लिए रख दिया। जब साहूकार का परिवार पूजा करके लौटा, तो उन्हें मांस और रक्त की वर्षा होने लगी। आकाशवाणी हुई कि रानी सीता ने गाय के बछड़े को मारकर गेहूं के ढेर में छिपा दिया है, जिस कारण यह सब हो रहा है। राजा ने भैंस को राज्य से बाहर कर दिया और गौवत्स द्वादशी का व्रत किया, जिसमें गाय और बछड़े की पूजा की जाती है।
