Holi Kab hai 2026 Date: मित्रो नमस्कार मैं हु मुकेश यादव इस लेख के माध्यम से मैंने आप को बताया है कि साल 2026 में होली का पर्व कब मनाया जाएगा इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और होलिका दहन करने की विधि क्या होगी। तो आप को बतादे की होली हिन्दुओ का एक प्रमुख पर्व है। जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है। जो होली रेंगों का तथा हँसी-खुशी का पावन पर्व है। यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन तक मनाया जाता है। जहां पहले दिन होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। हिंदू धर्म के अनुसार होतिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है।
और दूसरे दिन लोग एक दूसरे पर रंग अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं। और ढोल बजा कर होली के गीत गाते बजाते हैं। और घर-घर जाकर लोगों को रंग भी लगाते है। और रँगवाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन करने की परंपरा होती है। इसके अलावा होली के 8 दिन पहले से ही होलाष्टक लग जाता है। तो आप को बतादे की जब होलाष्टक लग जाता है तो कोई भी शुभ कार्य नही किया जाता है। बल्कि होलाष्टक के दौरान भगवान का भजन कीर्तन किया जाता है। इस बार होलाष्टक 24 फरवरी (मंगलवार) से लग रहे है। आईये जानते है साल 2026 में होली पर्व की तिथि होलिका दहन कब हेै और होलिका दहन का समय क्या है और पूजा विधि के बारे में
2026 में होली कब है Holi Kab Hai 2026 Date Time Muhurat
मित्रो अब आईये जानते है इस साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और उसके अगले दिन होली मनाई जाती है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार साल 2026 में फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 02 मार्च 2026 को शाम के 05 बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है। और इसके अगले दिन यानी 03 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हो रही है। साल 2026 में 03 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। और 04 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। इसलिए होलिका दहन के अगले दिन होली का त्यौहार मनाया जाएगा।
होलिका दहन करने का शुभ मुहूर्त रहेगा – 03 मार्च 2026 को शाम को 06 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। और भद्रा पूँछ का समय है – सुबह 01 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 02 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा भद्रा मुख का समय रहेगा – सुबह के 02 बजकर 35 मिनट लेकर सुबह के 04 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
होलका दहन की पूजा विधि Holika Dahan 2026 Puja Vidhi
होटिका दहन की पूजा करने के लिए सबसे पहले जातक स्नान आदि से निर्वित हो जाये। होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा की जाती है। और होलिका की पूजा वाले स्थान पर उत्तर या पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। अब सबसे पहले प्रथम पूज्नीय भगवन गणेश जी और गौरी की पूजा करे। इसके बाद ओम होलिकाय नमः होलिका के लिए,ओम प्रह्वादाय नमःभक्त प्रहलाद के लिए और ओम नसिंहाय नम: नरसिंह भगवान के लिए दिप जालये। इसके बाद होलिका दहन के लिए इकट्ठा की गई लकड़ी को कच्चे सूत से तीन या सात बार लपेटे और परिक्रमा करते-करते कच्चा सुत होलिका के चारो और लपेटा जाता है।
फिर लोटे का शुद्ध जल ओर पूजन की अन्य सभी वस्तुओं को श्रद्धाभाव से एक-एक करके होलिका में समर्पित करे। और धुप गंध, पुष्प आदि से पूजा करके फिर अपनी मनोकामना करे ओर अपनी गलितयों के लिए क्षमा मांगे। मान्यता है कि होलिका दहन करने वाले व्यक्ति को साल भर आरोग्य की प्राप्ति होती है| और सभी तरह की बुरी शक्तियों अग्नि में भस्म हो जाती हैं। तो कई जगह पर होलिका दहन पर लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है। होलिका दहन को कुछ जगह पर छोटी होली भी कहते हैं।
