नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्रि के आठवे दिन मां महागौरी की पूजा कैसे करे? मां को कैसा भोग लगाएं, किस रंग के कपड़े पहने और किस तरह पूजा करके मां को प्रसन्न करें। भक्त इसके अलावा इस दिन किये जाने वाले उपाय के बारे में ! आईये जानते है।
2025 Navratri 8th Day Puja Vidhi: हिन्दू धर्म मे शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का एक अपना महत्व माना जाता है। नवरात्रि माता दुर्गा को समर्पित होता है। नवरात्रि में मां को प्रसन्न करने केलिए भक्तजन व्रत व पूजा अनुष्ठान करते है। मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दिनों मां के नौ स्वरूपों की पूज्ञा अर्चना करने से मां भक्तो की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। और घर मे शुख समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि में अष्टमी तिथि का काफी महत्व होता हैं। नवरात्रि में पड़ने वाली दुर्गा अष्टमी को महाअष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां मढ गौरी की पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिवजी को पति रूप में पाने के लिए ही मां महागौरी स्वरूप में जन्म लिया था।
इस दौरान उन्हें कई वर्षो तक कठोर तप करना पड़ा था और किये गए अपने कड़े तप की वजह से मां का रंग काला पड़ गया था। माता पार्वती की श्रद्धा से महादेव अति प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया जिसके बाद देवी पार्वती का रंग गोरा हो गया। उसी दिन से देवी पार्वती का ये स्वरूप महागौरी के नाम से विख्यात हुआ। मां दुर्गा का ये रूप बेहद शांत एवं निर्मल होता है।
मां महागौरी पूजा का महत्व
मां महागौरी की पूजा का महत्व पाप और बाधाओं को दूर करना, मानसिक शांति और समृद्धि प्राप्त करना, विवाह संबंधी परेशानियों को ठीक करना और सभी इच्छाओं को पूरा करना है। उनकी कृपा से साधक अलौकिक सिद्धि, सुख-समृद्धि प्राप्त करता है और जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति पाता है। मां महागौरी की पूजा से नौ ग्रहों को भी बलवान किया जा सकता है।
मां महागौरी का स्वरूप
बात करे मां के स्वरूप के बारे में मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत गौर और शांत है, जिनका रंग शंख, चंद्र और कुंद के फूल के समान है। उनकी चार भुजाएँ हैं, जिनमें ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल, ऊपर के बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा है। मां सफेद वस्त्र धारण करती हैं। और उनका वाहन वृषभ (बैल) है। वह भक्तों को सुख-समृद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं।
मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
और या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों के जाप से सुख-सौभाग्य, संतान प्राप्ति, रोगमुक्ति और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मां महागौरी पूजन की विधि 2025 Navratri 8th Day Puja Vidhi
आप सबसे पहले माता रानी के भोग के लिए प्रसाद तैयार करे। प्रसाद जैसे पूरी, हलवा, चने-छोले, खीर, और अन्य मिष्ठान ध्यान रखें की माता रानी का प्रसाद पूरी शुद्धता के साथ तैयार किया जाना चाहिए। अब माता रानी को प्रसाट का भोग लगाए नवरात्रि पर कन्या पूजन के लिए कन्याओं को आमंत्रित करना जरूरी होता है। इसके लिए एक दिन पहले ही नौ कन्याओं और एक लड़के को आमंत्रित करले। नवरात्रि में नव कन्याओं के साथही 1 लड़के का भी पूजन किया जाता है। लड़के को बटुक भैरव को का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
यदि आपको नौ कन्याएं नहीं मिल रही हैं तो जितनी कन्याएं है उनका ही पूजन करे। बाकी कन्याओं के हिस्से का भोजन गाय को खिलादे। अब सभी कन्याओं और भैरव के पैर स्वच्छ जल से धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं। अब सभी का रोली या कुमकुम और अक्षत से तिलक करे। और उनकी पूजा करे कन्याओं को भोजन खिलाये। लेकिन ध्यान रखें कि कन्याओं को भोजन खिलाने से पहले पूजा स्थान में मां को भोग अवश्य लगाले। इसके बाद सभी कन्याओ और बटुक भैरव को भोजन परोसे।
भोजन होने के बाद उन्हें प्रसाट के रूप में फ़ल, और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा अथवा उनके उपयोग की वस्तुये प्रदान करे। अब सभी कन्याओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करे। व्रतधारी अपने व्रत का पारण भी माता रानी के प्रसाद से ही करे। माता रानी के व्रत का पारण माता रानी के प्रसाद से ही करना चाहिए। यानी जो भी प्रसाद अपने माता रानी को भोग के रूप में लगाया है। उससे ही अपने नवरात्र व्रत का पारण करे।
