Phulera Dooj Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में होली का त्यौहार कई तरह से मनाया जाता है। होली का पर्व राधा कृष्ण से जुड़ा है। इसलिए ब्रज में इसकी रौनक खास होती है। ब्रज में बसंत पंचमी से शुरू होने वाला होली उत्सव 40 दिन तक चलता है। इसमें कहीं लठमार होली, लड्डू होली तो कहीं फूलों की होली का खास महत्व है। फाल्गुन में फुलेरा दूज के दिन फूलों की होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है। फुलेरा दूज के दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी की विधि विधान पूर्वक पूजा कर उन्हें रंग बिरंगे फूल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि सुयोग्य जीवन साथी की कामना के साथ इस दिन कुंवारी लड़कियां व्रत रखती है। यह त्यौहार प्रेम संबंधों में मिठास भर देता है। इस दिन श्री कृष्ण और राधा जी का फूलों से श्रृंगार करने पर वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है।
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है यह दिन राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण जी के दिव्य प्रेम को समर्पित है इस दिन होली के त्योहार का आरंभ हो जाता है दोस्तों हिंदू धर्म में हर दिन कोई न कोई व्रत और त्योहार जहां भगवान श्री कृष्ण के भक्त रहते हैं वहां पर का त्योहार बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा ब्रज क्षेत्र वृंदावन और हत्या में बड़ी खुशी से इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन को फुलेरा दूज के नाम से जानते हैं कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा-अर्चना की जाती है इस दिन भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार भगवान को मिठाई का भोग लगाते हैं और रंग और अबीर इत्यादि भी अर्पण करते हैं।
यह त्योहार वसंत पंचमी और होली के बीच में आता है जो कि होली आने की तैयारी के रूप में मनाया जाता है इस दिन कृष्ण और राधा जी के साथ फूलों की होली खेली जाती है। साथ ही नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन को सभी प्रकार के दोषों से रहित माना गया है जिस कारण इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य किया जा सकता है। और इस दिन यदि आप अपने पूजा घर में को भी भगवान की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं। तो इसके लिए यह दिन और जो प्रतिमा आपके घर के मंदिर में पहले से कि उनकी इस दिन वस्त्र आदि बदल कर नए वस्त्र धारण करें और उन्हें सुंदर फूलों से सजाएं ऐसा माना जाता है कि इस दिन कृष्ण जी ने होली खेलने की परंपरा शुरू की थी।
फुलेरा दूज कब है 2026 – Phulera Dooj Kab Hai 2026 Date Time
चलिए जान लेते हैं कि साल 2026 में फुलेरा दूज कब मनाई जाएगी। आपको बता दें कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी 2026 को शाम 4:57 से हो रही है। वहीं इसका समापन अगले दिन यानी 19 फरवरी 2026 को दोपहर 3:58 पर होगा। तो उद्या तिथि को देखते हुए फुलेरा दूज 19 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:56 से लेकर सुबह 8:21 तक रहेगा और इस दिन सूर्योदय सुबह 6:56 पर रहेगा और इस दिन सूर्यास्त शाम 6:14 रहेगा और इस दिन राहु काल का समय दोपहर 2:00 बजे से दोपहर 3:25 25 मिनट तक रहेगा।
फुलेरा दूज के दिन क्या करे क्या नहीं
इस समय आप कोई भी शुभ कार्य ना करें क्योंकि राहु काल अशुभ समय होता है। फुलेरा दूज Phulera Dooj Kab Hai को रंगों का त्यौहार भी माना जाता है। यह त्यौहार राधा और कृष्ण जी के मिलन के दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली जाती है और माखन मिश्री का भोग भी लगाया जाता है। मथुरा और वृंदावन में यह त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों से मुक्त होता है। इसलिए इस दिन को अबूज मुहूर्त माना जाता है। इस दिन को मांगलिक कार्य खासकर विवाह के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन नया बिजनेस शुरू करना शुभ होता है। साथ ही इस दिन श्रृंगार की वस्तुएं दान करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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फुलेरा दूज पूजा विधि
फुलेरा दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत श्री राधा कृष्ण के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। अब सूर्य देव को जल अर्पित करें। श्री राधा कृष्ण का गंगाजल, दही, जल, दूध और शहद से अभिषेक करें। उन्हें वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार करें। अब उन्हें चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर विराजमान करें। उनके ऊपर टोकरी से फूलों की बरसात करें। इसके बाद नैवेद्य, धूप, फल, अक्षत समेत विशेष चीजें अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर उनकी आरती और मंत्रों का जाप करें। इसके पश्चात उन्हें माखन, मिश्री, खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल को अवश्य शामिल करें। मान्यता है कि बिना तुलसी दल के भगवान श्री कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते हैं। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
फुलेरा दूज की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अत्यधिक व्यस्तता के कारण भगवान श्री कृष्ण जी ने राधा से मिलने नहीं जा पा रहे थे राधा जी के होने पर उनकी सहेलियां भी कृष्ण जी से रूठ गए राधा के उदास होने के कारण मथुरा के वह सूख गए और पुष्प मुरझा गए भगवान श्रीकृष्ण को की हालत का अंदाजा लग गया और उन्होंने राजा से मिलने का निश्चय किया श्री कृष्ण जी जैसे ही से मिलने वृंदावन पहुंचे। राधा जी खुश हो गए और चारों ओर फिर से हरियाली ही हरियाली के मुरझाए पुष्पों के जाने पर प्रश्न जी ने उसे तोड़ लिया है और राधा जी को छेड़ने के लिए उन पर मारने लगे प्रश्न के जवाब में राधा जी ने भी पूजा तोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के ऊपर फिकवा यह देख वहां मौजूद ग्वाले और गोपियां भी एक-दूसरे पर फूल बरसाने लगे। मान्यताओं के अनुसार इस दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि इसीलिए इस तिथि को पूरा देश के नाम से जाना जाता है फुलेरा दूज पर फूलों की होली खेलने की शुरुआत हुई इसीलिए कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने सबसे पहले राधा और गोपियों के संग होली खेली थी।

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