नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2025 में इस बार करवा चौथ का व्रत कब रखा जाएगा, पूजा की सही तिथि, शुभ मुहर्त, पूजा विधि, महत्व और करवा चौथ व्रत में पढ़ी जाने वाली कथा के बारे में आईये जानते है।
Karwa Chauth 2025 Date And Time: मित्रो यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस व्रत को करवा चौथ का व्रत कहा जाता है। सुहागिन स्त्रियों के लिए यह बहुत ही श्रेष्ठ और उत्तम व्रत है। स्त्रियाँ इस व्रत को अपने पति की दीर्घायु के लिए करती है। हिन्दुओ में इस व्रत को बहुत ही अधिक महत्व प्राप्त है। वास्तव में यह एक अन्यन्त प्रभावशाली तथा उपयोगी व्रत है।
करवा चौथ व्रत का महत्व
इस व्रत को करने करवा माता अत्यंत प्रसन्न होती है। और अतिउत्तम फल प्रदान करती है। इस व्रत को करने से स्त्री के पति को लम्बी आयु की प्राप्ति होती हैं । उनके सभी प्रकार के रोग-शोक दूर हो जाते हैं । इस व्रत प्रभाव-स्वरूप पति-पत्नी का प्रेम स्थायी बना रहता है और उनका दाम्पत्य-जीवन अत्यन्त सुखी हो जाता है। इस ब्रत के प्रभाव-स्वरूप उत्तम सन्तान की प्राप्ति होती है। और इस प्रकार से वंश की वृद्धि होती है। इस व्रत को करने से धन-धान्य विद्या, बुद्धि आदि, की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से परिवार में सदैव सुख-शान्ति बनी रहती है। इस प्रकार से यह व्रत समस्त मनोकामनायें पूरी करने वाला और अति उत्तम फल देने वाला है।
करवा चौथ पूजा सामग्री
करवा माता की पूजा करने के लिए पूजा की थाली में यह सभी वस्तुएं जरूर होनी चाहिए। जैसे- पीली मिट्टी, पिले या लाल रंग का कपड़ा, लकड़ी का पटरा, करवा मिट्टी का, रोली, सिंदूर, कलावा, दीपक, रुई, घी, धूपबत्ती, कपूर, फूल-माला, पान, पंचपेवा, पंचामृत, मौसम के अनुसार फल, पेड़ा, बतासा, गंगाजल न होने पर सादा स्वच्छ पानी, चावल आदि।
करवा चौथ का व्रत करने की विधि
इस दिन सुहागिन स्त्रियों को प्रातःकाल ही घर की साफ-सफाई आदि करके स्नान आदि से निवृत्त हो लेना चाहिए। इस दिन स्त्री को पूरे दिन निर्जल उपवास करना चाहिए। फिर पूजन की सभी सामग्री को एकत्रित कर ले, इसके बाद में शाम के समय अपने घर के पूजा स्थान या आंगन को स्वच्छ करले। फिर स्त्री को मुंह हाथ धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और आभूषण पहनने चाहिए।
फिर चावल को पीसकर उसमें थोडा-सा सिन्दूर तथा पानी मिलाकर मिश्रण बना लें और इससे दीवार पर करवा माता और भगवान गणेश का चित्र बनायें। साथ ही सूर्य, चन्द्रमा, सुहाग की विभिन्न वस्तुओं (चूडी, बिंदी, बिछूआ आदि) आदि दूध देने वाली गाय करुआ बेचने वाली कुम्हारिन, सात भाई और उनकी इकलौती बहन आदि के भी चित्र बनाये जाते हैं। यदि आपको चित्र बनाने में कोई समस्या हो तो आजकल बाजार में करवा चौथ का कैलेण्डर छपा हुआ मिल जाता है।
उसे लाकर दीवार पर चिपका लेना चाहिये अथवा इस पुस्तक की एक अन्य प्रति रख लेनी चाहिये। फिर पीली मिट्टी से भगवान शिव तथा माता पार्वती के प्रतीक (स्वरूप) बना लेने चाहिये। वास्तव में माता पार्वती के पति (भगवान शिव जी) को अजर-अमर माना जाता हैं। इसलिये उनकी पूजा करके माता पार्वती से प्रार्थना की जाती है। कि हमारे पति को भी लम्बी आयु प्रदान करें। फिर लकडी का पटरा रखकर उस पर पीले या लाल रंग का कपडा बिछा दें और उस पर उन स्वरूपों को रखें।
मिट्टी के करवा में कलावा बाँध दें और उसमें पानी भरकर रखें। फिर दीपक, धूपबत्ती आदि जला लें फिर रोली-चावल से पूजा करें और फूल आदि चढाये। इसके बाद में फुलं मिठाई, मेवा आदि समर्पित करें। खाँड़ या चीनी का बना हुआ करवा भी वहीं लाकर रख लें। यदि एक से अधिक महिलायें एक साथ मिलकर पूजन कर रही हैं। तो सभी महिलाओं को मिट्टी का करवा और खाँड का करवा-अपना-अपना अलग-अलग लाना चाहिये । शेष पूजन-सामग्री को अलग-अलग लाने की आवश्यकता नहीं है।
फिर कोई एक महिला करवा चौथ की व्रत-कथा को पढकर सुनाये और-शेष महिलायें शान्ति के साथ में सुनें। इसके बाद में सभी महिलायें मिलकर जोर का जयकारा लगायें – करवा माता की जय। भगवान भोलेनाथ की जय माता माता पार्वती की जय, भगवान गणेश की जय इसके बाद में कपूर जलाकर आरती गाते हुए आरती करनी चाहिये। इसक बाद में सभी महिलाओं को अपने से बडी महिलाओं के पैर छुकर आशीर्वाद लेना चाहिये। रात को जब आकाश में चन्द्रमा निकल आये तो उसे देखकर उसे प्रणाम करना चाहिये।
और मिटटी के करवा में भरे हुये पानी से अर्घ्य देना चाहिये। कई स्थानों पर चन्द्रमा को चलनी की ओट से देखने की परम्परा भी है। इसके बाद में अपने पति के चरण-स्पर्श करने चाहिये। घर में यदि कोई बडी महिला ( जैसे सास, जेठानी आदि) हों तों उनके भी चरण- स्पर्श करने चाहिये। इसके बाद में व्रत का पारण करना चाहिये। ( अर्थात भोजन आदि ग्रहण करना चाहिये)।
खाँड या चीनी वाले करवा को- घर की बडी महिला सदस्य ( जैसे – सास, जेठानी आदि) को भेंट में देना चाहिये – इसे बायना देना कहते हैं। वह इसे खा सकती हैं। पूजन के समय चढ़ाये गये- फल, मिठाई आदि को किसी मन्दिर में भेज देना चाहिये अथवा गरीब बच्चों को देना चाहिये । इस प्रकार से यह व्रत सम्पूर्ण होता है।
Karwa Chauth 2025 Date And Time: 2025 में करवा चौथ कब है, जाने तारीख और समय
| व्रत त्योहार के नाम | दिन व तारीख |
|---|---|
| करवा चौथ व्रत | 10 अक्टूबर 2025 – शुक्रवार |
| चतुर्थी तिथि शुरू होगी | 09 अक्टूबर 2025 – रात 10:54 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त होगी | 10 अक्टूबर 2025 – रात 07:38 बजे |
| करवा चौथ पूजन मुहूर्त | शाम 05:57 बजे – शाम 07:11 बजे तक |
| चाँद निकने का समय | रात 08:13 बजे |
करवा चौथ की व्रत कथा
एक साहूकार था जिसके सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई व बहन एक साथ बैठकर भोजन करते थे। एक दिन कार्तिक मास के कृष्णपक्ष को चौथ का व्रत आया तो साहूकार की पत्नी, उसकी बहुओं और बेटी ने व्रत रखा था। शाम को जब सभी भाई भोजन करने के लिये बैठे तो उन्होंने अपनी बहिन से कहा- आओ बहिन भोजन कर लें। तब बहिन बोली- आज मेरा करवा चौथ का व्रत हैं। इसलिये चाँद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही भोजन करूँगी। तब भाइयों ने सोचता कि चाँद के।निकलने तक बहिन भूखी रहेगी। अतः एक भाई पेड पर चढ गया और वहाँ उसने एक दिया जलाया और दूसरे हाथ से चलनी की ओट कर दी।
जिससे वह दूर से चाँद जैसा लगने लगा। फिर शेष भाई अपनी बहन को उस नकली चाँद को दिखाकर कहने लगे- बहिन ! चाँद निकल आया है चलकर उसे अर्घ्य दें दो। बहिन अपनी भाभियो से बोली- चाँद निकल आया हैं चलो अर्घ्य दे दें। तब भाभियां बोली- तुम्हारा चाँद निकला होगा, हमारा चांद तो रात को ही उठेगा। तब बहिन ने अकेले ही उस नकली चाँद को अर्घ्य दे दिया उसके बाद जब वह खाना खाने लगी तो पहले हो ग्रास में बाल आ गया दूसरे ग्रास में कंकड आया और तीसरा ग्रास मुंह की ओर करते ही उसकी ससुराल से संदेशा आया कि उसका पति बहुत बीमार है। जल्दी भेजो अपनी लडकी को विदा करते समय माँ ने कहा- रास्ते में तुम्हे जो मिले उसके पाव लगना और जो कोई भी सुहागिन रहने का आशीर्वाद दे उसके पल्ले में गाठ लगाकर उसे कुछ रुपये देना।
बहिन जब भाइयों से विदा होकर ससुराल को चली तो रास्ते में जो भी मिला वह सबके पाँव लगी। सबने उसे यही आशीर्वाद दिया- तुम सात भाईयों की बहन तुम्हारे भाई सुखी रहें और तुम उनका सुख देखो। सुहाग का आशीर्वाद किसी ने नहीं दिया। जब वह ससुराल पहँची तो दरवाजे पर उसकी छोटी ननद खडी थी। वह उसके भी पाँव लगी तो उसने कहा- सुहागिन रहो दूधो नहाओ-पूतो फलो। उसने यह सुनकर उसके पल्ले में गाँठ बाँधी और उसे सोने का सिक्का दिया। फिर भीतर गयी तो सास ने कहा तेरा पति धरती पर पडा है। तो वह अपने पति के पास जाकर उसकी सेवा करने के लिये बैठ गई बाद में सास दासी के हाथ बची-खुची रोटी भेज दी।
इस प्रकार से समय बीतते- बीतते अगहन ( मार्गशीर्ष ) की चौथ आई तो वह चौथ माता से बोली ! हे माता आप ही मेरा उद्धार करोगी। आपको मेरा सुहांग देना पडेगा। तब उस चौथ माता ने बताया- पूस (पौष) की चौथ आयेगी, वह मेरे से बड़ी है, उससे ही कहना। इतना कहकर चौथ माता चली गई। फिर अगले महीने पूस (पौष) की चौथ आई और वह भी यही कहकर चली गई- आगे आने वाली चौथ से कहना। इस प्रकार से माघ फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण भादों- की चौथ आयीं और चली गई। फिर जब असौज ( आश्विन) की चौथ आई तो उसने बताया- कार्तिक की चौथ ही तुम्हारा सुहाग वापिस कर सकती है।
वह आये तो उससे विनती करना। फिर वह भी चली गई जब कार्तिक की चौथ आई तो बोली- भाइयों की प्यारी करवा ले, दिन में चाँद उगानी करवा ले, व्रत खंडन करने वाली करवा ले। यह सुनकर वह चौथ माता के पाँव पकडकर गिडगिडाने लगी- चौथ माता ! मेरा सुहाग तुम्हारे हाथों में है, आप ही मुझे सुहागिन करें। तो चौथ माता बोली- तुम्हारे व्रत भंग कर देने से भगवान श्री गणेश जी अप्रसन्न हो गये हैं। और इसी कारण से तुम्हारे पति
की यह गति हुई है। अब यदि तुम पुन: पूरे विधि-विधान पूर्वक व्रत करोगी तो तुम्हारा पति जीवित हो सकता है। यह सुनकर उसने विधि-विधान पूर्वक व्रत किया और चंद्रमा निकलने पर उसे अर्घ्य दिया।
उसके इस प्रकार से व्रत सम्पन्न करने से गणेशजी अत्यन्न प्रसन्न हुये और उनकी आज्ञा पाकर करवा चौथ माता अपने टीके में से रोली लेकर उसके आदमी पर छींटा दिया। तो वह उठकर बैठ गया और बोला- आज मैं बहुत सोया हूँ। वह बोली- पूरे बारह महीने सोये हो। आज गणेशजी और करवा चौथ माता की कृपा से उठे हो। हे करवा चौथ माता ! आपने जिस प्रकार से उसके पति को आयु प्रदान की वैसे ही हमारे पति.को दीघांयु प्रदान करना । जो भी इस व्रत को करे और जो भी इस कथा को पढे या सुने- उन सबके पतियों को दीर्घायु प्रदान करना।
