शीतला अष्टमी कब है 2026 | Sheetala Ashtami 2026 Date

शीतला अष्टमी कब है 2026 | Sheetala Ashtami 2026 Date
शीतला अष्टमी कब है 2026 | Sheetala Ashtami 2026 Date

Sheetala Ashtami 2026 Date: नमस्कार मित्रो मैं हु मुकेश यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि साल 2026 में शीतला अष्टमी जिसे बसोड़ा के नाम से भी जानते हैं। वो कब है? उसकी दिनांक व तिथि क्या है। पूजा की विधि क्या है। और पूजा का शुभ मुहूर्त की भी बात करेंगे। साथ ही साथ कौन सी ऐसी गलतियां हैं जो शीतला अष्टमी के व्रत में नहीं करना चाहिए संपूर्ण जानकारी

दोस्तों हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व होली के आठवें दिन पड़ता है। इस दिन माता शीतला की पूजा अर्चना की जाती है। शीतला माता को रोगों से बचाने वाली देवी माना गया है। खासकर स्किन इंफेक्शन या चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए शीतला माता की पूजा का खास महत्व बताया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता बल्कि एक दिन पहले बने खाने को खाया जाता है और इसी से देवी की पूजा भी की जाती है।

शीतला अष्टमी कब है 2026 – Sheetala Ashtami 2026 Date

दोस्तों अब जानते हैं साल 2026 में शीतला अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा? इस साल साल 2026 में शीतला अष्टमी यानी कि बसोड़ा 11 मार्च को है। बात करें पूजा के शुभ मुहूर्त की तो 11 मार्च को सुबह 6:35 से लेकर शाम 6:27 तक शीतला माता की पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

शीतला अष्टमी पूजा विधि

शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर आप स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। फिर शीतला माता के मंदिर में जाकर या घर में ही माता शीतला की मूर्ति की स्थापना कर वहां पर पूजा विधि विधान से करें। माता को जल, अक्षत, रोली, हल्दी, चंदन और फूल अर्पित करें। माता को रात में बने हुए बासी भोजन का ही भोग लगाएं।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि माता शीतला की पूजा करते समय जो दीपक दीपक जो लगाया जाता है वह जलाकर नहीं देते हैं। आप आटे का दीपक बना लें। उसमें बाती डालें और घी भी डालें लेकिन उसे प्रज्वलित नहीं करना है। ठंडा दीपक ही दान करना है। धूप दीप बिना जलाए पूजा करनी है माता शीतला की। माता शीतला को सुहाग की सामग्री जरूर अर्पित करनी चाहिए। इससे कहा जाता है कि माता से सौभाग्य का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है।

शीतला अष्टमी के दिन क्या करे क्या नहीं (नियम)

बसोड़ा पूजा या शीतला अष्टमी की पूजा से एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को शाम के समय अपने रसोई घर अच्छे से साफ सफाई करके भोजन बना लें। माता शीतला को बासी खाने का ही भोग लगाया जाता है। इस दिन माता को भोग में मुख्य रूप से दही, रबड़ी, चावल, हलवा, पूरी आदि बनाकर माता को भोग लगाया जाता है। इसके बाद बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है। शीतला अष्टमी को बसोड़ा के नाम से भी जानते हैं।

क्योंकि इस दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और घर के सभी सदस्य इस दिन बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं। एक दिन पहले यानी कि सप्तमी तिथि को ही रात में माता के लिए भोग तैयार हो जाता है। और दूसरे दिन यानी अष्टमी तिथि को माता शीतला को भोग चढ़ाया जाता है। शीतला अष्टमी का व्रत महिलाएं अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए रखती है। माना जाता है कि शीतला अष्टमी का व्रत रखने से परिवार के सदस्यों को किसी भी प्रकार का रोग नहीं लगता।

इस दिन व्रत रखना और माता की पूजा करने से परिवार के सदस्य सेहतमंद रहते हैं। ध्यान रखने वाली बात यह है कि सारा जो भोग है वह सप्तमी तिथि को ही तैयार हो जाता है। और अष्टमी तिथि को घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और ना ही घर में झाड़ू पोछा लगाया जाता है। माता शीतला की पूजा के लिए हल्के रंग के वस्त्र पहनना उत्तम माना जाता है। इस दिन काला, नीला या गहरे रंग के वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। माता शीतला की पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा और शांति के नियम का पालन करना चाहिए। बिल्कुल भी शोरशराबा नहीं होता। बहुत शांति से माता की पूजा की जाती है।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम मुकेश यादव है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और संस्थापक हूं और इस वेबसाइट के माध्यम से भारतीय संस्कृति, ज्योतिष, जीवन शैली, राशिफल, रेसिपी, रोचक-कहानियां, अमावस्पूया, पुर्णिमा, विवाह मुहूर्त, त्यौहार की तिथि समय, तंत्र-मंत्र, साधना, पूजा-पाठ, व्रत कथा, आदि से संबंधित जानकारी साझा करता हूं।

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