Somvati Amavasya: धर्म ग्रंथों के अनुसार अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव हैं। इस दिन पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय जैसे पिंडदान, श्राद्ध आदि किए जाते हैं। अमावस्या तिथि पर सूर्य व चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। जब अमावस्या तिथि का संयोग सोमवार को बनता है तो यह सोमवती अमावस्या कहलाती है। इसे अन्न अमावस्या से अधिक शुभ माना गया है। इस दिन शिव जी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। 15 जून का दिन बहुत ही खास है। इस दिन कई सहयोग बन रहे हैं।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो जेष्ठ अधिक मास का अंतिम दिन है। सोमवार होने से इस दिन सोमवत्ती अमावस्या (Somvati Amavasya) का सहयोग बन रहा है। वहीं इसी दिन सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। जिससे इस दिन मिथुन संक्रांति का भी पर्व मनाया जाएगा। विद्वानों के अनुसार अमावस्या, सूर्य संक्रांति और अधिक मास का संयोग सदियों में एकाध बार ही देखने को मिलता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करनी चाहिए। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। गरीबों को फल और भोजन का दान करना चाहिए। और काले तिल को जल में प्रवाह करना चाहिए।
मान्यता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं। अगर आप भी सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) के दिन व्रत रखना चाहते हैं तो आपको जानना बहुत जरूरी है कि सोमवती अमावस्या के दिन व्रत अगर रखा है तो क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए क्योंकि ऐसी कई चीजें हैं जिनका सेवन सोमवती अमावस्या के दिन वर्जित होता है। तो चलिए जानते हैं –
Somvati Amavasya के दिन क्या खाना चाहिए क्या नहीं
सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya)के व्रत में आपका खान-पान कैसा आपका खान-पान कैसा होना चाहिए। व्रत आपको फलाहार रखना है या भोजन करके रखना है। इस दिन आपको क्या खाना है, क्या नहीं खाना है।इस व्रत को या तो निर्जल आप रख सकते हैं या फल खाकर भी रख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखना है कि जब तक आप पीपल के वृक्ष की पूजा ना करें तब तक आपको ना तो फल लेना है ना ही जल लेना है। पीपल वृक्ष की पूजा के बाद आप चाहे तो फलाहार कर सकते हैं और अगर आपके यहां भोजन करके आप व्रत रखना चाहते हैं,
तो आपको बता दें कि सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) के व्रत में आपको सिर्फ एक बार अनाज वो भी मीठा भोजन करना होता है। इसमें नमक का सेवन वर्जित होता है। और अगर आप नमक के बिना व्रत रखने में समर्थ नहीं है तो इस कंडीशन में आप सेंधा नमक जो फलाहारी नमक आता है उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब बात करते हैं कि भोजन में आपको सेंधा नमक इस्तेमाल करके आपको क्या खाना चाहिए, क्या नहीं? तो ध्यान रखें कि व्रत में सिर्फ सात्विक आहार ही ग्रहण करना है। बिना प्याज और लहसुन वाला और बिना साधारण नमक सेंधा नमक का इस्तेमाल करके करना है। गेहूं की आटे की रोटी, पूरी, पराठा, दही के साथ ले सकते हैं या मीठी पूरी बनाकर आप खा सकते हैं या फिर गेहूं के आटे का हलवा बनाकर भी आप खा सकते हैं।
इसके अलावा चावल की खीर भी आप खा सकते हैं। यदि आपने फलाहार व्रत रखा है तो सुबह की पूजा के बाद आप जल, फल, चाय, ड्राई फ्रूट्स आदि ले सकते हैं। शाम को भी फलाहारी भोजन ले सकते हैं। आप इस व्रत में कुट्टू के आटे की पूरी अथवा हलवा बनाकर खा सकते हैं। आलू की सब्जी समा के चावल की खीर भी बनाकर आप खा सकते हैं।
खिचड़ी बनाकर खा सकते हैं साबूदाने की। चलिए अब बात करते हैं कि सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) के दिन क्या नहीं खाना है। तो आपको बता दें इस दिन मांस मदिरा को घर में नहीं लाना है। इस दिन प्याज, लहसुन का इस्तेमाल नहीं करना है। इसके अलावा आप इस दिन आपको बता दें कि इस दिन आपको मसूर की दाल, सरसों का साग, मूली और बैंगन नहीं खाना चाहिए।
कई जगहों पर अमावस्या के दिन चावल, खीर और पूरी खाने या दान करने से भी रहेज किया जाता है। तो दोस्तों, आज आपने जाना कि सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) का महत्व क्या है? इस दिन क्या करना चाहिए? क्या नहीं करना चाहिए? याद रखें किसी भी व्रत या पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग है सच्ची श्रद्धा, सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म।