नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करे। आरती कैसे करे, प्रसाद और भोग कैसे लगाए ! आईये जानते है।
2025 Navratri 1st Day Puja Vidhi: नवरात्र का पहला दिन माता शैलपुत्री की पूजा विधि रंग भोग नवरात्र पर्व माता दुर्गा की प्रति आस्था और विश्वास प्रकट करने वाला पर्व है। नवरात्र में माता को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन व्रत और पूजा अनुष्ठान करते हैं। वैसे तो प्रत्येक वर्ष में चैत्र आषाढ़ आश्विन और माघ महीने में चार बार नवरात्र आते हैं। लेकिन उस चैत्र और अश्विन माह के नवरात्र को प्रमुख माना जाता है। वहीं अन्य दो गुप्त नवरात्र मनाई जाती है। नवरात्र दुर्गा को समर्पित होता है।
पूरे नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में मां आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माँ कोशैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्रि प्रथम दिन कलश स्थापना करने के बाद माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार इनकी पूजा करने से चंद दोष से मुक्ति मिलती है।
वे कन्याये जो कुवारी है उन्हें भी माता शैलपुत्री की पूजा करने और व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को खुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। माता का यह रूप अपने किये गए फैसलों पर अडिंग रहने के लिए प्रेरित करता है। शैल का अर्थ होता है पत्थर और पत्थर को सदैव अडिक माना जाता है।
मां शैलपुत्री पूजा विधि
नवरात्र के प्रथम दिन सूर्योदय से पूर्व उठे। और स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहने अब पूजा में एक लकड़ी की चौकी ले और इस पर सबसे पहले मां शैलपुत्री की मूर्ति स्थापित करे। अगर मूर्ति हो तो माता दुर्गा की तस्वीर की पूजा करे। अब गंगाजल से स्नान पवित्र कर धूप, दिप और अगरबत्ती जलाएं शुभ मुहूर्त में घटस्थापना और कलश स्थापना करने के बाद माता शैलपुत्री रूप का ध्यान करे।
अब मां के व्रत रखने का संकल्प ले और देवी शैलपुत्री को फल, मिठाई का भोग लगाएं। शैलपुत्री माता की कथा, आरती, चालीसा, दुर्गा स्तुति और दुर्गा स्त्रोत का पाठ करे। और अंत मे भोग लगाकर प्रसाद सभी लोगो मे वितरित करदे।
मां शैलपुत्री का स्वरूप
मां शैलपुत्री के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है। मां देवी की सवारी नंदी बैल पर वियाजमान हैं। जो संपूर्ण हिमालय पर राज करती है। इसलिए मां का एक नाम वृषारुढा भी हैं। देवी सती ने जब पुनर्जन्म लिया तो पर्वत राज हिमालय के घर जन्मी और शैलपुत्री कहलाई। मान्यता है कि नवरात्रि में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को चंद दोष से मुक्ति मिल जाती है।
मां शैलपुत्री का प्रिय भोग
पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से मां को शैल समान अथार्त सफेद वस्तुये प्रिय होती है। इसलिए मां की पूजा सफेद फूलो से की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां को सफेद फूल, और सफेद भोग अर्पित किए जाते है। मां शैलपुत्री के चरणों मे गाय का घी अर्पित करने से भक्तो को आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। और उनका मन और शरीर दोनों निरोग रहता है।
मां शैलपुत्री का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण सन्थिता !
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्यै नमो नमः !!
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।
