2025 Navratri 2st Day Bramhacharini Puja Vidhi: नवरात्रि का दुसरे दिन, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करे? जानिए, भोग, मंत्र, आरती

नमस्कार मित्रो मैं हु अजीत यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्र के दुसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करे। आरती कैसे करे, प्रसाद और भोग कैसे लगाए ! आईये जानते है।

2025 Navratri 2st Day Bramhacharini Puja Vidhi: नवरात्र का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी पूजा विधि रंग और भूख नवरात्र पर्व माता दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास प्रकट करने वाला पर्व है। प्रत्येक वर्ष में चैत्र आषाढ़ आश्विन और माघ महीने में चार बार नवरात्र आती लेकिन उसे चैत्र और अश्विन माह के नवरात्र को प्रमुख माना जाता है। वहीं अन्य दो गुप्त नवरात्रि मानी जाती है नवरात्रि माता दुर्गा को समर्पित है। नवरात्रि में हर दिमाग के अलग-अलग स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है।

नवरात्र में मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन व्रत और पूजा अनुष्ठान करते हैं। नवरात्र का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। मां का यह रूप भक्तों को मनचाहा वरदान का आशीर्वाद लेता है। भगवान शंकर को पति रूप में पाने की लिए घोर तपस्या की थी। और तपस्या के कारण देवी को तपश्चरिणी और ब्रह्मचारिणी के अनुसार इनकी पूजा से मैं तप त्याग वैराग्य सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

मां के इस स्वरूप की बात करें तो मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का है जो कि पूरे रूप से ज्योतिमर्य है। कठिन तपस्या की वजह से मां के मुख पर अटूट तेज और आभामंडल विद्यमान रहता है। मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है।

मां को साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है। और यह देवी तपस्या की प्रति मूर्ति है। मां ब्रह्मचारिणी दुर्गा शिव स्वरूप गणेश जननी, नारायणी विष्णु माया और पूर्ण ब्रह्म स्वरूपिणी के नाम से प्रसिद्ध है।

मां ब्रह्मचारिणी के पसंदीदा भोग

मां ब्रह्मचारिणी के बारे में बात करे तो माता को दूध और दूध से बने व्यंजन अतिप्रिय है। इसलिए आप मां की पूजा के दौरान उन्हें दूध से बने व्यंजनों का भोग लगा सकते है। साथ ही मां को शक्कर का भोग भी प्रिय हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

नवरात्र के दिनों में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहने मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले या सफेद वस्त्र पहने ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा स्थान पर स्थापित करें। अपने हाथों में फूल लेकर मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें। और प्रार्थना करें इसके बाद देवी को पंचामृत से स्नान कराएं। फिर अलग-अलग तरह के फूल अक्षत कुमकुम सिंदूर अर्पित करें। इसके अलावा कमल का फूल भी चढ़ाये अब मां के मंत्र ॐ ब्रह्मचारिणे नमः कम से कम 108 बार जप करें। और मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री पसंद है।

इसलिए उन्हें चीनी मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं ऐसा करने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं। इसके बाद भगवान शिवजी की पूजा करें और फिर ब्रह्मा जी के नाम से जल्द फूल और अक्षत हाथ में लेकर ॐ ब्रह्मणे नमः कहते हुए इसे भूमि पर रखें। बता दे कि मां को दूध से बने व्यंजन भी अति प्रिय है। तो आप उन्हें दूसरे व्यंजनों का भोग लगा सकते हैं। इसके बाद मां की कथा और आरती करें। अंत मे भोग लगाकर प्रसाद सभी लोगों में वितरित करें।

मां ब्रम्हचारणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top