Navratri 4th Day Puja Vidhi: नवरात्रि का चौथा दिन, मां कुष्मांडा की पूजा कैसे करे? जानिए, भोग, मंत्र, आरती

2025 Navratri 4th Day Puja Vidhi

नमस्कार मित्रो मैं हु मुकेश यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्र का चौथा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा (Navratri 4th Day Puja Vidhi) कैसे करे। आरती कैसे करे, प्रसाद और भोग कैसे लगाए ! आईये जानते है। नवरात्रि पर्व माता दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास प्रकट।करने वाला पर्व है। नवरात्रि पर्व 9 दिनों तक मनाया।जाता है, नवरात्रि में हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूजा की जाती है। नवरात्र में मां को प्रसन्न।करने के लिए भक्तजन व्रत व पूजा अनुष्ठान करते है। नवरात्रि का चौथा दिन माता कुष्मांडा को समर्पित होता है। यानी नवरात्रि के चौथे दिन देवी कुष्मांडा की पूजा का विधान है। मां कुष्मांडा की पूजा से आयु, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।

मान्यता है कि जब दुनिया नही थी तब इन्ही देवी ने अपनी मुस्कान से ब्रम्हांड की रचना की। इसलिए इन्हें सृष्टि का आदिशक्ति कहा गया। मां कूष्मांडा की मधुर मुश्कान हमारे जीवनी शक्ति का संवर्धन करते हुए हमें कठिन से कठिन मार्ग पर हंसते हुए चल कर सफलता पाने को प्रेरित करती है, मां कुष्मांडा की विधि विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। माता कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटो से मुक्ति दिलाती है।

मां दुर्गा के चौथे स्वरूप का महत्व

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कुष्मांडा देवी है। मां को टुखों को हरने वाली मां भी कहा जाता है। सूर्य मां का निवास स्थान है इसलिए मां के इस स्वरूप के पीछे सूर्य का तेज दरसाया जाता है। कहा जाता है कि मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्तो के सभी दुख समाप्त हो जाते है। जो भी ब्यक्ति बिधि विधान से मां की पूजा करता है, देवी के तेज प्रताप से वो रोग मुक्त हो जाता है।

मां कुष्मांडा का स्वरूप

मां कूष्मांडा के स्वरूप की बात करे तो मां की आठ भुजाएं हैं। इसलिए देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है। मां की सवारी सिंह है। मां कुष्मांडा अपने हाथों में धनुष बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमण्डल धारण किया हुआ है। वही एक और हाथ मे मां के हाथों में सिद्धियो और निधियों युक्त माला भी है। संस्कृत भाषा मे माता को कुम्हडा कहते है, और मां कुम्हड़ा को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है। कुम्हड़ा यानी कद्दू, या पेठा, जिसका हम घर मे सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते है। ज्योतिष में मां कुष्मांडा का सम्बंध बुध ग्रह से है। मां कुष्मांडा की विधिवत पूजा करने से विशेष फल मिलता है।

मां कुष्मांडा का मंत्र

मान्यता है कि मां कुष्मांडा के इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से आप के जीवन मे उन्नति आती है। और सभी प्रकार के रोग दोष दूर हो जाते है। मां कुष्मांडा अपने भक्तों पर थोड़ी सी भक्ति पर जल्दी प्रसन्न हो जाती है। और यश, बल और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। मां कुष्मांडा का मंत्र इस प्रकार है-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां कुष्मांडा का प्रिय भोग

मां कुष्मांडा को मालपुआ अति प्रिय है इसलिए नवरात्र के चौथे दिन माता की मालपुआ का प्रसाद चढाने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

मां कुष्मांडा पूजा विधि Navratri 4th Day Puja Vidhi

नवरात्रि के चौथे दिन प्रातः काल स्नान आदिनसे निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें। मां की पूजा आप हरे रंग का वस्त्र पहनकर करे तो अधिक शुभ माना जाता है। अब पूज़ा घर में एक चौकी ले और उसपर सबसे पहले मां कूष्मांडा की तस्वीर स्थापित करें। अगर तस्वीर न हो तो मां दु्गा की ही प्रतिमा की पूजा करे। अब गंगाजल से स्थान पवित्र कर मां की फोटो या मूर्ति के सामने धी का दीपक और अगरबती जलाएं और उन्हें तिलक लगाएं।

पूजा में मां को लाल रंग के फूल गुडहल या गुलाब का फूल चढ़ाए इसके बाद मां को सिंधुर, धूप, अक्षत आदि अर्पित करे। मां के मुख्य मंत्र “मां कुष्मांडा देव्यै नमः” का 108 बार जाप करे। इस मंत्र से यश, बल, परिवार में खुशहाली के साथ ही आयु में बृद्धि होती है। मां को दही, मालपुए का भोग लगाएं। मां कुष्मांडा की कथा पढ़े और आरती करें। मां कुष्मांडा की पूजा के बाद भगवान शिव जी और परमपिता ब्रम्हा जी की पूजा करे और पूजा के बाद हलवे का प्रसाद सभी में वितरित करे।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम मुकेश यादव है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और संस्थापक हूं और इस वेबसाइट के माध्यम से भारतीय संस्कृति, ज्योतिष, जीवन शैली, राशिफल, रेसिपी, रोचक-कहानियां, अमावस्पूया, पुर्णिमा, विवाह मुहूर्त, त्यौहार की तिथि समय, तंत्र-मंत्र, साधना, पूजा-पाठ, व्रत कथा, आदि से संबंधित जानकारी साझा करता हूं।

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