Navratri 3st Day Puja Vidhi: नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करे? जानिए, भोग, मंत्र, आरती

नमस्कार मित्रो मैं हु मुकेश यादव मैने इस लेख के माध्यम से बताया हूँ कि नवरात्र के तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा (Navratri 3st Day Puja Vidhi) कैसे करे। आरती कैसे करे, प्रसाद और भोग कैसे लगाए ! आईये जानते है। नवरात्रि पर माता दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास प्रकट करने वाला पर्व है। प्रत्येक वर्ष में चैत्र, आषाढ, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्रि आती है। लेकिन इनमें चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है। वहीं अन्य दो गुप्त नवरात्रि मानी जाती हैं। नवरात्रि माता दुर्गा को समर्पित होता है। नवरात्रि में हर दीन मां के अलग स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि में माँ को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन व्रत व पूजा अनुष्ठान करते है।

नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। मां का यह रूप बेहद निराला है। क्योकि मॉ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याण कारी है। माँ के मस्तक में घंटे का आकार का अर्ध चंद्र मौजूद है। यही कारण है कि मां के इस रूप को चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। इनकी पूजा से बल और यश में बढ़ोतरी होती है। स्वर में दिव्यअलौकिक मधुरता आती है।

नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा (Navratri 3st Day Puja Vidhi) करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता यह भी है कि माता चंद्रघंटा की व्रत कथा पढ़ने या सुनने से बुरे ग्रहों के प्रभाव खत्म हो जाते हैं। नवरात्रि जो कि हिंदुओं का विशेष पर्व होता है इन दिनों माता के न स्वरूपों की पूजा होती है। नवदुर्गा की पूजा आराधना सच्चे मन से करने से व्यक्ति की सभी परेशानियां और भय दूर हो जाते हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा करने से अशुभ ग्रह के प्रभाव खत्म होते हैं। धर्म के अनुसार देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर निर्भयता सौम्यता और विनम्रता जैसी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।

देवी का यह रूप अत्यंत शांत और सौम्य है माता के सिर पर अर्ग चंद्रमा और मंदिर के घंटे लगे रहने के कारण देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा है। नवरात्रि का तीसरा दिन यानी मां चंद्रघंटा का दिन भय से मुक्ति और अपार साहस प्राप्त करने का होता है। मां के दशो हाथों में अस्त्र-शस्त्र है और इनकी मुद्रा युद्ध की मुद्रा है। ज्योतिष में इनका सबंध मंगल ग्रह से होता है। मां चंद्रघंटा के सच्चे मन से व्रत रखने और पूजा करने से मां अपने भक्तों का हर तरह से कल्याण करती है। और भक्तों को सभी तरह के पापो से मुक्ति मीलती है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां चंद्रघंटा के स्वरूप की बात करं तो दस भुजाएं और तीन आँखे है। देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। आठ हाथों में खड़क, बाण दिव्य अस्त्र-शस्त्र है। और दो हाथो में मां भक्तों को आशीष देती है। मां के मस्तक में घंटे का आकार का अर्ध चंद्र मौजूद है। इसलिए मां के रूप को चन्द्रघंटा के नाम से जाना जाता है।

मां चंद्रघटा का प्रिय भोग

मां चंद्रघटा को दूध और उससे बनी चीजें और सफेद चीजों का भोग लगाना चाहिए। इनमें खीर या फिर सफेद बर्फी ले सकते हैं। इन भोग से माता बहुत जल्द ही प्रसन्न होती है। और भक्तो की अभिलाषा पूरी करती है।

मां चंद्रघटा पूजा विधि Navratri 3st Day Puja Vidhi

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का उपवास और पूजा की जाती हैं। सबसे पहले मां चंद्रघटा की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा के स्थान पर स्थापित करे। अब अपने हाथों में फूल लेकर मां चंद्रघंटा का ध्यान करे व प्रार्थना करें। अब उन्हें सिंदूर अक्षत, धूप, पुष्प, शृंगार का सामान आदि अर्पित करे। फिर दूध से बने मिस्ठान का भोग लगाना चाहिए। मां चंद्रघंटा को चमेली के पुष्प अतिप्रिय है। इसलिए मां को चमेली के पुष्प अर्पित करे।

माँ के मन्त्र ओम देवी चन्द्रघण्टाये नम: मन्त्र का कम से कम 108 बार जाप करें। और मां को प्रसाट चढ़ाएं, मां को भोग में मखाने की खीर का भोग लगाए। इससे मां बहुत जल्द ही खुश हो जाती हैं। और भक्तों के दुखो का नाश करती है। अब मां चंद्रघंटा की आरती करे। इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ और मां दुर्गा की आरती करें। माता को लगाए गए भोग को प्रसाद स्वरूप कोंगो में वितरित कर दे।

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मां चंद्रघण्‍टा का पूजा मंत्र

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥

मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

मां चंद्रघण्‍टा की आरती

मां चंद्रघण्‍टा की आरती।
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।।

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।

चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।।

मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।।

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।।

हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।।

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।।

कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।।

नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।।

मां चंद्रघण्‍टा की कथा

एक कथा के अनुसार – जब देवी देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चल रहा था। तब असुरों के स्वामी महिषासुर ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर इंद्र का सिंहासन छीन लिया और खुद स्वर्ग का स्वामी बन बैठा। इसको देखकर सभी देवता गण काफी दुखी हो गए स्वर्ग से निकाले जाने के बाद देवता गण इस समस्या से निकलने के लिए त्रिदेव यानी ब्रह्मा विष्णु और महेश के पास गए वहां जाकर सभी देवताओं ने असुरों के किए गए अत्याचार और इंद्र चंद्रमा सूर्य और वायु और अन्य देवताओं के सभी छीने गए अधिकारों के बारे में भगवान को बताया देवताओं ने भगवान को बताया कि महिषासुर के अत्याचार के कारण स्वर्ग लोक तथा पृथ्वी पर अब विचरण करना असंभव हो गया है।

तब यह सुनकर ब्रह्मा विष्णु और भगवान शिव शंकर अत्यंत क्रोधित हो गए उसी समय तीनों भगवानों के मुख से एक ऊर्जा उत्पन्न हुई। देवता गणों के शरीर से निकली ऊर्जा एक साथ मिल गई यह ऊर्जा 10 दिशाओं में व्याप्त होने लगी तभी वहां एक कन्या उत्पन्न हुई। तब शंकर भगवान ने देवी को अपना त्रिशूल भेंट किया भगवान विष्णु ने उनको चक्र प्रदान किया। इस तरह सभी देवताओं ने माता को अस्त्र शस्त्र देकर सजा दिया इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी माता को भेंट किया। सूर्य ने अपना तेज तलवार और सवारी के लिए शेर प्रदान किया तब देवी सभी शस्त्रों के साथ महिषासुर से युद्ध करने के लिए युद्ध भूमि में आ गई उनका यह विशाल रूप देखकर महिषासुर भैसे काप उठा तब महिषासुर ने अपनी सेना को मां चंद्रघंटा पर हमला करने को कहा तब देवी ने अपने अस्त्र शस्त्र से असुरों की सेना को क्षण भर में नस्त कर दिया।

इस तरह मां चंद्रघंटा ने असुरों का वध किया और देवताओं को अभयदान देते हुए अंतरध्यान हो गई या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमः तो यह थी मां चंद्रघंटा की कथा आपको यह कथा कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताना लेकिन उससे पहले जानते हैं। मां चंद्र की पूजा विधि नवरात्रि के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा (Navratri 3st Day Puja Vidhi) स्वरूप का विधि विधान से इस मंत्र ओम देवी चंद्र घंटा नमः का जाप करके आराधना करनी चाहिए। इसके बाद मां चंद्रघंटा को सिंदूर अक्षत गंध धूप पुष्प आदि अर्पित करना चाहिए आप देवी को चमेली का पुष्प अथवा कोई भी लाल फूल अर्पित कर सकते हैं साथ ही साथ दूध से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ और दुर्गा आरती का गान कर सकते हैं।

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